वसई-विरार के लोगों का हाल-बेहाल

  • लोकल में यात्रा की अनुमति न मिलने से बढ़ रहा आक्रोश
  • बस में यात्रा से समय, श्रम और पैसे की बर्बादी

राधा कृष्णन सिंह

विरार. लोकल ट्रेनों में आवागमन की अनुमति न मिलने से वसई-विरार के नौकरीपेशा लोगों का हाल- बेहाल है. सुबह 8 बजे ड्यूटी पर पहुंचने के लिए लोगों को अल्सुबह 4 बजे बस डिपो की कतार में लगना पड़ता है. वसई-विरार क्षेत्र से बोरिवली, दादर, मुंबई सेंट्रल, मंत्रालय के लिए हजारों लोग यात्रा करते हैं. लोकल सेवा उपलब्ध न होने के कारण बस से यात्रा करने पर समय, श्रम और पैसे तीनों की बर्बादी होती है. 

घंटों कतार के बाद बस यात्रा

नालासोपारा बस डिपो पर सुबह 5 बजे से बस पकड़ने के लिए यात्रियों की लंबी कतार लगती है. 8 बजे ड्यूटी पर पहुंचने के लिए 3 से 4 बजे तक घर से  बस डिपो के लिए निकलना पड़ता है. जहां एक से डेढ़ घंटे लंबी कतार में लगने के बाद बस मिलती है. एसटी की अपेक्षा शिवशाही एवं एशियाड बस में 30 से 40 रुपये अतिरिक्त भाड़ा लिया जाता है. एसटी से बोरिवली तक जाने के लिए 60 रुपए लगते है.वहीं एक बार के लिए एशियाड और शिवशाही बस का भाड़ा 90 से 100 रुपए हैं. ड्यूटी के समय ज्यादातर इन्हीं बसों को छोड़ा जाता है जिससे मजबूरी में लोग यात्रा करते हैं और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

बस पकड़ने की जल्दी में यात्री सोशल डिस्टेंसिग की धज्जियां उड़ाते हैं. कोरोना महामारी का भय दिखाकर सरकार सामान्य यात्रियों के लिए लोकल सेवा शुरू नहीं कर रही है, लेकिन खाली पेट भरने के लिए कोरोना के बीच यात्रियों को यातना भरी बस यात्रा करनी पड़ती है. सामान्य यात्रियों के लिए लोकल सेवा शुरू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है. यात्रियों का कहना है कि जिस प्रकार सोशल डिस्टेंसिग को ध्यान में रखते हुए बस सेवा शुरू की गई है, उसी आधार पर सोशल डिस्टेंसिग का ध्यान रखते हुए सामान्य यात्रियों के लिए लोकल सेवा शुरू की जाए. 

आर्थिक बोझ बढ़ा रही यात्रा

लॉकडाउन के कारण कई लोगों की नौकरी चली गई, तनख्वाह में कटौती हो रही है. ऐसे में बस यात्रा और आर्थिक बोझ बढ़ा रही है. नालासोपारा, विरार रेलवे स्टेशन से यात्रा करने वाले लोगों ने पिछले दिनों लोकल शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था, लेकिन सरकार ने इस मामले में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे कारण लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है.