सड़कों पर गड्ढे वाला शहर बना वसई-विरार

राधा कृष्णन सिंह

विरार. मां जीवदानी की चरणों में बसे वसई- विरार के उत्तर में वैतरना नदी, दक्षिण में वसई खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर की खाड़ी के अलावा पूर्व में घने जंगलों के बीच बसे तुंगार की ऊंची पहाड़ियों के कारण यह शहर एक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है, लेकिन इन दिनों वसई- विरार की पहचान गड्ढों के शहर या फिर अवैध निर्माण के शहर के रूप में हो रही है. 

2003 में हुई थी मनपा की स्थापना

 3 जुलाई 2003 को वसई- विरार शहर मनपा की स्थापना हुई थी.पहले आयुक्त के रूप में किशोर बोर्डे के बाद वर्तमान में कमिश्नर की कुर्सी पर गंगाधरन डी. आसीन हैं. इस कार्यकाल के बीच कई कमिश्नर बदले गए, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वह इस शहर के हालात, ना ही यहां की सड़के गड्ढामुक्त हुईं, ना ही अवैध निर्माण रुके. शहर का जो नजारा पहले था, वहीं आज भी कायम है. इस शहर की सड़कों की मरम्मत को लेकर मनपा की ओर से हर वर्ष करोड़ों का ठेका दिया जाता है, लेकिन स्थानीय सत्ताधारियों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से किए गए विकास कार्य हर वर्ष बरसाती पानी में बह जाते हैं.  इस मामले को लेकर आज तक प्रशासन की ओर से सम्बन्धित ठेकेदार पर कार्रवाई न किया जाना खुद अपने आपमें कई सवाल खड़े कर रहा है.

सड़क कम गड्ढे ज्यादा नजर आ रहे

वर्तमान में क्षेत्र की सड़कों की हालत ऐसी है कि सड़क कम गड्ढे ज्यादा नजर आ रहे हैं. इन गड्ढों में गिरकर आए दिन दो पहिया वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, लेकिन मनपा प्रशासन बिल्कुल मौन है. इसके अलावा बड़े वाहन चालक भी परेशान हैं.क्योंकि ऐसी सड़कों पर चलने के कारण वाहन ज्यादा खराब हो रहे हैं और उन्हें मरम्मत की जरूरत पड़ रही है.

क्षेत्र के विकास के लिए सत्ता परिवर्तन जरूरी

वसई- विरार शहर भाजपा जिलाध्यक्ष राजन नाईक ने कहा कि पिछले 25 वर्ष से लगातार सत्ता पर काबिज लोगों का प्रशासन और इंजीनियर की मिलीभगत से हुए भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण शहर की सड़कें दे रहे हैं, जो अब तक नहीं बदलीं. ठेकेदार-इंजीनियर से ज्यादा उम्मीद भी सम्भव नहीं है. इस क्षेत्र के विकास और सुधार के लिए अब सत्ता परिवर्तन जरूरी है.

प्रशासन के मिस मैनेजमेंट का नतीजा

वसई-विरार शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ऑनिल अल्मेडा ने कहा कि शहर का सुधार ना होना मनपा प्रशासन के मिस मैनेजमेंट का नतीजा है.जो कार्य ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं उनकी जांच जरूरी होती है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं देता है. जिसके कारण पैसे खर्च होने के बाद भी समस्या यथावत बनी रहती है. वर्तमान में कमिश्नर से सुधार की कुछ उम्मीद की जा रही है.

कमिश्नर का जवाब देने से इनकार

इस संबंध में वसई-विरार मनपा कमिश्नर और कार्यकारी अभियंता राजेन्द्र लाड से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने अर्जेंट मीटिंग का हवाला देते हुए जवाब देने से इंकार कर दिया. दोबारा फोन किए जाने पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.