वसई- विरार में भ्रष्टाचार का बोलबाला

– प्रांत अधिकारी व तहसीलदार के खिलाफ सामूहिक आंदोलन

– लॉकडाउन के दौरान सरकारी योजनाओं में जमकर हुई धांधली

– विभिन्न दलों व संगठनों ने भ्रष्ट अधिकारियों को हटाने की मांग की

राधा कृष्णन सिंह 

वसई. वसई- विरार मनपा क्षेत्र में बढ़ते कोरोना संक्रमण की रोकथाम एवं जरूरतमंद लोगों की मदद को लेकर सरकार द्वारा तमाम योजनाएं चलाई जा रही है. योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी क्षेत्र के अधिकारियों को सौंपी गई है, लेकिन वसई प्रांत अधिकारी व तहसीलदार की कार्यशैली पर असंतोष जताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई व उनकी बदली की मांग लेकर वसई प्रांताधिकारी कार्यालय के बाहर विभिन्न पार्टी व संगठन के लोगों द्वारा संयुक्त रूप से धरना-आंदोलन किया गया. 

इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए आंदोलन में शामिल लोग हाथों में संबंधित अधिकारियों के विरोध में स्लोगन लिखी तख्तियां हाथ में लेकर चल रहे थे. जिसका नेतृत्व मी वसईकर अभियान अध्यक्ष मिलिंद खनोलकर, नालासोपारा विधानसभा संगठक शिवसेना के प्रमोद दलवी, संस्थापक राष्ट्र प्रथम संगठन से शिवकुमार पांडेय व प्रहार जनशक्ति पक्ष के जिलाध्यक्ष हितेश जाधव द्वारा संयुक्त रूप से किया गया. 

जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंचा राशन

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि कोई भूखा ना सोए इसलिए तीनों टाइम खाना वितरण हो.ऐसी योजनाएं सरकार की द्वारा बनाई गई, जो अन्य जिलों में सफल साबित हुई. लेकिन वसई तालुका में इन योजनाओं की धज्जियां उड़ते हुई दिखी.गरीबों में राशन वितरण हो या खिचड़ी वितरण इन योजनाओं को गरीबों तक ले जाने में वसई प्रांत अधिकारी और तहसीलदार नाकामयाब रहे. सत्तापक्ष के कार्यकर्ताओं ने अपने मतदाताओं को ही राशन दिए. गरीबों, आदिवासियों और मजदूरों को राशन नहीं मिला. वसई तालुका में घटिया दर्जे की खिचड़ी का वितरण हुआ जो जानवर भी नहीं खा सकता. इसकी शिकायत करने पर तहसीलदार ने लोगों को बेइज्जत करके अपने कार्यालय से निकाल दिया. 

प्रवासी मजदूरों से भी हुई लूट

इसके अलावा महाराष्ट्र शासन ने प्रवासी मजदूरों को गांव पहुंचाने के लिए निशुल्क ट्रेन की व्यवस्था की थी, लेकिन नगरसेवक और कई सारे लोगों ने मिलकर प्रवासी मजदूरों से पैसों की लूट की. जिसकी शिकायत तहसील और प्रांत से करने के बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं की गई. साथ ही प्रवासी मजदूरों की भीड़ को मैनेज करने में भी प्रांत अधिकारी और तहसीलदार नाकामयाब रहे, जिसके कारण एक महिला की वसई में मौत हो गई. इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ प्रांत अधिकारी और तहसीलदार है. महाराष्ट्र शासन ने ई पास की सुविधा कर रखी थी, जिसके लिए भी वसई तहसीलदार से पैसे की डिमांड की गई और कई सारे लोगों को पैसे लेकर ही पास दिए गए.