कोरोना से ज्यादा अकेलेपन से परेशान थे वसीमुद्दीन

मुंबई. रोटी का बिजनेस करने वाले वसीमुद्दीन शेख को संक्रमण कैसे हुआ, इसकी सही जानकारी तो नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि सेवन हिल्स और हीरानंदानी हॉस्पिटल में रोटी की सप्लाई करने जाते थे, संभवत: उसी दौरान उन्हें इंफेक्शन हुआ. 20 मई से वसीमुद्दीन को बुखार आने लगा.अस्पताल में जाकर दवा लिए. बाद में उनके सीने में दर्द होने लगा और गले में खराश होने लगी. 

25 मई को वसीमुद्दीन मरोल मिलिट्री रोड स्थित हसीर हॉस्पिटल में एडमिट हुए. 26 को उनका कोरोना टेस्ट किया गया, 27 को रिपोर्ट पॉजिटिव आई. वसीमुद्दीन के अनुसार हॉस्पिटल में उन्हें डोलो-650, hcqs-200, एजी-500 दवाइयों के साथ विटामिन ‘सी’ और मल्टीविटामिंस दिए गए. उनका खाना घर से आता था. हॉस्पिटल में गर्म पानी आदि मिलता था. वसीमुद्दीन की शिकायत है कि जिस हॉस्पिटल को कोविड-19 केस देखने के लिए नगरसेवक की मदद से उन्होंने परमीशन दिलवाई, उसी हॉस्पिटल ने बीमारी के दौरान उनका सही ढंग से इलाज नहीं किया. 

मरीज को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए

39 वर्षीय वसीमुद्दीन को सबसे ज्यादा तकलीफ हुई अकेलेपन का. इस दौरान उनका 12 किलो वजन कम हो गया. डॉक्टर और परिवार के लोग भी उनके पास नहीं आते थे. उनका कहना है कि ठीक है बीमारी खतरनाक है, लेकिन कम से कम डॉक्टर और नर्स को किट पहन कर मेरे पास तक हाल-चाल लेने आना चाहिए था. उन्होंने कहा कि इससे मेरा तनाव बढ़ जाता था. साथ ही जैसे-जैसे हॉस्पिटल में इलाज का बिल सुनता था, मेरा तनाव और बढ़ जाता था. यानि हॉस्पिटल की व्यवस्था से वे खुश नहीं थे. उन्हें कुल 1,80,000 रुपए हॉस्पिटल में व्यय करने पड़े. 4 जून को वे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो गए. अंधेरी पूर्व स्थित मरोल मिलिट्री रोड अपने आवास पर उन्होंने 15 दिन की क्वारंटाइन अवधि भी पूरी कर ली. वसीमुद्दीन ने कहा कि किसी भी मरीज को भले ही कितनी खतरनाक बीमारी हो, उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए. इससे मरीज की हालत और खराब हो जाती है. पेशेंट को ढाढस देना चाहिए. सब कुछ नियमित रखें, कोरोना खत्म हो जाएगा.