कोरोना से बचाव में योग की अहम भूमिका, योग गुरु हंसा योगेन्द्र की सलाह

– योग से बने निरोग

मुंबई. कल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है. यह दिवस ऐसे समय में आया है, जब पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है. ऐसे में योग का महत्व काफी अधिक बढ़ जाता है. सांताक्रुज स्थित द योग इंस्टिट्यूट की निदेशक हंसा योगेन्द्र का मानना है कि योग एक जीवन शैली है जिससे न हम सिर्फ कोरोना का मुकाबला कर सकते हैं, बल्कि पूरी जिंदगी अपने को स्वस्थ रख सकते हैं. कोरोना से बचने में योग की भूमिका के अलावा अन्तराष्ट्रीय योग दिवस के महत्व को लेकर हमारे वरिष्ठ संवाददाता लतिकेश शर्मा ने हंसा योगेन्द्र से खास बातचीत की. पेश है प्रमुख अंश.   

वर्त्तमान में पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है.ऐसे में इस बीमारी से बचाव में योग कितना कारगर सिद्ध हो सकता है?

आज के दौर में हम सभी कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं. ऐसे में योग का महत्व काफी बढ़ जाता है. मैं लोगों को सलाह दूंगी कि वे योग की शुरुआत सुबह उठने के साथ बिस्तर से ही करें. सुबह उठते के साथ वे बिस्तर में अपने आप को पहले रिलैक्स करें. प्राणयाम करने के साथ बिस्तर से उठना काफी फायदेमंद हैं. इससे रातभर सोने से शरीर में हुई अकड़न निकल जाती है.   उसके बाद एक गिलास गरम पानी में निम्बू निचोड़ कर पीने के बाद पेट की सफाई करें. नित्य कर्म से निवृत होने के बाद वे योग करें. सुबह के समय योग करना काफी फायदेमंद होता है. 

 कोरोना से बचाव के लिए कौन से योगासन काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं?

कोरोना से बचाव में अनुलोम-विलोम, कपालभाति, प्राणायाम व भस्त्रिका कर आप आपनी इम्युनिटी पॉवर को बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा लोग अपनी सुविधानुसार पवनमुक्त आसन भी कर सकते हैं. भस्त्रिका सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया है. इस आसन से फेफड़ा मजबूत होता है. इसके अलावा फेफड़े को मजबूत बनाने के लिए दंडासन, भुजंगासन, बितिलासन व शलभासन भी कर सकते हैं.

लॉकडाउन की वजह से लोग काफी दिनों से घरों  में बंद हैं. इस वजह से वे डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं. योग किस तरह से डिप्रेशन को दूर करने में सहायक है?

डिप्रेशन मन की एक अवस्था है. जिसकी बड़ी वजह यह है कि हमारा मन हमेशा भटका हुआ होता है. भटके हुए मन को एकाग्र चित करने में योग की बड़ी भूमिका है. इसके लिए सुखासन कर सकते हैं.  सुखासन को करने से मन को सुख और शांति मिलती है. इस आसन से शरीर में  ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है. इस आसन का नियमित अभ्यास करने से  मन में उदासी नहीं रहती है और डिप्रेशन में राहत मिलती है.डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए त्रिकोणासन, हलासन,कोणासन भी कर सकते हैं. 

 इन दिनों योग सीखने के लिए कई लोग सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं. योग सीखने के लिए गुरु का होना कितना जरुरी है?

मेरा मानना है कि किसी भी विद्या  को सीखने के लिए गुरु का होना जरुरी है. क्योंकि कई बार होता है कि हम जाने-अनजाने में आसन को गलत ढ़ंग से योग करते हैं . जिसकी वजह से फायदा होने की वजह से नुकसान की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है. फ़िलहाल लॉकडाउन की वजह से बाहर जाना थोड़ा मुश्किल है. ऐसे में जो अच्छे गुरु हैं, उनके वीडियो को देख कर योग का अभ्यास कर सकते हैं, लेकिन मेरी सलाह है कि  जिन्दगी सामान्य होने के  बाद आप किसी जानकार गुरु के मार्गदर्शन में ही योग करें.

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस  पर हमारे  पाठकों के लिए आप का क्या संदेश है?

मैं सभी से यह कहना चाहती हूं कि इस बार कोरोना संकट पर आप घर में ही योग कर इस दिवस को मनाएं , लेकिन  यह योग सिर्फ एक दिन के लिए नहीं होना चाहिए.आप योग को  जीवन का एक अभिन्न अंग बना लें, ताकि आप पूरी जिंदगी निरोग रह कर आप जीवन का भरपूर आनंद ले सकें.