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नागपुर. कोरोना के संकट से जूझते लोगों के सहयोग के लिए भले ही मनपा की ओर से कई स्तरों पर लोगों से अपील की जाती हो, लेकिन मनपा में ‘दिया तले अंधेरा’ की कहावत चरितार्थ होते दिखाई दे रही है. इसका सटिक उद्हारण है कि महामारी में अविरत सेवा कार्य करते हुए मनपा के भले ही अबतक 18 कर्मचारियों की मौत हो गई, किंतु अबतक प्रशासन की ओर से ऐसे पीड़ितों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए 50 लाख के बीमा की व्यवस्था ही नहीं की है.

जिसे लेकर अब मनपा की राष्ट्रीय नागपुर कार्पोरेशन एम्प्लाईज एसोसिएशन ने कड़ा रूख अपनाते हुए प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद करने की चेतावनी दी है. संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि प्रशासन लगातार इसे नजरअंदाज करता आ रहा है. जिसका खामियाजा मृतक कर्मचारी के परिजन भुगत रहे हैं. 

380 कर्मचारी हुई बाधित
संगठन ने कहा कि कोरोना के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए मनपा के सफाई कर्मचारी, शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मचारी और अन्य कर्मचारी लगातार जुटे हुए हैं. हालांकि इन कर्मचारियों को बीमा का लाभ तो नहीं दिया जा रहा है, किंतु कार्य के दौरान मास्क, सेनेटाईजर, ग्लोव्ज जैसे सुरक्षात्मक वस्तुएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रहा है.

सेवारत कर्मचारियों के स्वास्थ्य को भी नजरअंदाज किए जाने का आलम यह है कि अबतक 380 कर्मचारी कोरोना की चपेट में आ गए. कोरोना से बाधित इन कर्मचारियों के हितों के लिए संगठन की ओर से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना अंतर्गत 50 लाख का बीमा कराने की मांग करते हुए काफी पहले ही प्रशासन को ज्ञापन दिया है. किंतु इसे तवज्जों नहीं दिया जा रहा है.

तो करेंगे आंदोलन
कई बार स्मरण पत्र देने के बाद भी मनपा प्रशासन की ओर से इसे हलके में लिया जा रहा है. जबकि कर्मचारी और उसका परिवार त्रास्दी से गुजर रहा है. यदि शीघ्र ही उपाय नहीं किया गया, तो आंदोलन की भूमिका अपनाने की चेतावनी अध्यक्ष सुरेन्द्र टिंगने, रंजन नलोडे, प्रवीण तंत्रपाले, ईश्वर मेश्राम, संजय मोहतो, हेमराज शिंदेकर, बलीराम शेंडे आदि ने दी.