Shriram Urban Co oprative bank

  • 4 माह में जोड़े 9 लाख के चार्जेस

नागपुर. डीआरटी द्वारा स्टे देने के बावजूद श्रद्धानंदपेठ स्थित श्रीराम अर्बन कोआपरेटिव बैंक द्वारा भवानी मंदिर स्थित मार्गेज प्रापर्टी के तौर पर बालाजी मोबाइल शोरूम को बेचने के मामले में नीत नये खुलासे हो रहे हैं. शोरूम के मालिक प्रवीण मिश्रा के अनुसार, बैंक की अजीब कार्यप्रणाली से 44 लाख रुपये के लोन पर सीधे 35 लाख रुपये का ब्याज बना दिया गया. 2 वर्षों तक नियमित किश्तें भरने के बावजूद इन्हें हिसाब में नहीं जोड़ा गया. हद तब हो गई जब 4 माह में 9 लाख रुपये के चार्जेस जोड़कर लोन पहले 55 और फिर 64 लाख रुपये तक पहुंचा दिया गया.

बैंक को दी थी जानकारी
ज्ञात हो कि मिश्रा ने श्रीराम अर्बन कोआपरेटिव बैंक ने अपना शोरूम मार्गेज रखकर 44 लाख रुपये का लोन लिया था. मिश्रा ने 2 वर्षों तक नियमित रूप से किश्त भरी. बकौल मिश्रा, इसके बाद शोरूम में चोरी हो गई जिससे भारी नुकसान हुआ. मिश्रा ने तुरंत ही बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और घटना की जानकारी दी. लोन का इंश्योरेंस होने के बावजूद मिश्रा को इसका लाभ नहीं दिया गया. वहीं, होम क्रेडिट फायनांस के अरमान सैयद द्वारा लाखों की हेराफेरी, मां और 2 वर्ष की बच्ची की मौत से मिश्रा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. वह मानसिक और आर्थिक रूप से टूट गये. उन्होंने लोन चुकाने में देरी की जानकारी बैंक को दी और राहत की मांग की. बैंक अधिकारी मान गये.

इसके बाद मिश्रा ने 2 वर्षों से जमा किश्तों का हिसाब बैंक से मांगा. इन 2 वर्षों में करीब 12 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था. इसके बावजूद बैंक ने कार्यवाई रोकने के लिए सीधे 33 लाख रुपये की मांग कर ली. इतना ही नहीं, जब मिश्रा ने इस बारे में सवाल किया तो बैंक अपने दावे पर अड़ा रहा क्योंकि बैंक जानता था कि शोरूम की कीमत इससे अधिक है. 33 लाख रुपये देने में असमर्थता जताने पर बैंक ने सिर्फ 3 दिन में 25 लाख  रुपये भरने का फरमान सुना दिया ताकि किसी भी आधार पर बैंक कार्यवाही को रोका संभव ना हो.

कैकाड़े बंधुओं के साथ मिलीभगत
बैंक के जबरन दबाव से परेशान मिश्रा ने शोरूम बेचकर लोन चुकाने की तैयारी शुरू की. मिश्रा ने बताया कि जानकारी मिलते ही कैकाड़े बंधुओं ने संपर्क किया और 88 लाख रुपये में सौदा तय हुआ. लेकिन बाद में पता चला कि कैकाड़े ने यही मार्गेज प्रापर्टी 70 लाख रुपये में बैंक से खरीद ली है. यह बात पता चलते ही मिश्रा ने डीआरटी कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई. कोर्ट ने मिश्रा को स्टे देते हुए 12 लाख रुपये बैंक में जमा कराने को कहा. मिश्रा ने आदेश माना और 6-6 लाख रुपये के 2 चेक जमा करा दिये. बावजूद इसके बैंक और कैकाड़े ने दूकान की रजिस्ट्री करवा दी.