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  • साईं मंदिर का स्थापना दिन मनाया

नागपुर. गुरुवार को साईंबाबा सेवा मंडल द्वारा साईं मंदिर, वर्धा रोड का 41वां स्थापना दिन उत्साह से मनाया गया. इस उपलक्ष्य में मंदिर की फुग्गों व फूलों से आकर्षक रूप से सजावट की गई थी. साईंबाबा की मूर्ति के 41वें स्थापना दिवस पर शाम को आरती के पश्चात साईंबाबा को 41 किलो का बूंदी का लड्डू मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष विजयबाबा कोंड्रा के हस्ते सचिव अविनाश शेगांवकर की प्रमुख उपस्थिति में अर्पण किया गया. पश्चात उसे भक्तों को वितरित किया गया. इस अवसर पर मंदिर विश्वस्त सुधीर दफ्तरी व प्रताप रणनवरे, मंदिर के कर्मचारी कर्मचारी व बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे.

दत्त जयंती पर 3 दिसंबर 1979 को हुई थी प्राणप्रतिष्ठा 

वर्ष 1971 में विजयबाबा कोंड्रा शिर्डी गए थे, तो वहां के कोर्ट रिसीवर काशी पाठक ने कोंड्रा से कहा कि जिस नागपुर की गोपालराव बूटी जैसी हस्ती साईंबाबा की सेवा में रहती थी, वहां मंदिर क्यों नहीं बन रहा. साईंबाबा के अनन्य भक्त व सिद्ध पुरुष माने जाने वाले विजयबाबा कोंड्रा को यह बात लग गई. उन्होंने नागपुर आकर उस समय के शहर के गिने-चुने भक्तों से चर्चा की. हितवाद के तत्कालीन संपादक ए.डी. मणि और तत्कालीन सांसद एन.के.पी. साल्वे ने इस मसले पर तुरंत सहमति दी. एक 7 सदस्यीय ट्रस्ट का गठन हुआ. इस ट्रस्ट के प्रयासों से वर्ष 1974 में वर्धा रोड पर 20,000 वर्ग फीट जमीन खरीदी गई. 1976 में भूमिपूजन हुआ और 3 दिसंबर 1979 को दत्त जयंती के दिन मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा हो गई. 

कई विशेषताएं 

वर्धा रोड स्थित मंदिर की कई विशेषताएं हैं. एक तो यह कि इसमें बाबा की जो प्रतिमा विराजमान है, वह शिर्डी में विराजी प्रतिमा की अनुकृति है. मुंबई के उसी ‘तालीम आर्ट’ ने बनाया है जिसने शिरड़ी की मूल प्रतिमा बनाई थी. मंदिर की दूसरी विशेषता यह है कि इस मंदिर निर्माण के लिए पैसा जुटाने के क्रम में वर्ष 1974 में प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक भीमसेन जोशी का गायन कार्यक्रम ‘संतवाणी’ नगर में आयोजित किया गया और उसमें फिल्म अभिनेता दिलीपकुमार को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था.

इसी क्रम में वर्ष 1977 में धर्मेंद्र-हेमामालिनी की उपस्थिति में ‘शैलेंद्र सिंह नाइट’ का आयोजन भी हुआ था. धंतोली में भी साईंबाबा का मंदिर और है जिसे स्वयंभू कहते हैं और जो वर्ष 1956 में बना. वास्तव में इस मंदिर के संचालक विजयबाबा कोंड्रा ही वर्धा रोड स्थित बड़े मंदिर के सूत्रधार भी हैं. वर्धा रोड के साईंबाबा मंदिर में वर्ष 2002 में जब नवनिर्माण हुआ तो वहां प्रतीक के तौर पर एक चकिया धूनि स्थल के पास रख दी गई है. भगवान दत्त, गणेश, दुर्गा माता के अलावा यहां एक शिवलिंग भी स्थापित है.

बाबा के ठीक सामने दरवाजे पर एक नंदी भी बिठाया गया है. अनेक भक्त इस नंदी के कान में अपनी मनोकामना बताते हुए देखे जाते हैं. उनकी मान्यता है कि नंदी हमारी कामना को बाबा से कहकर पूरी कराएगा क्योंकि दत्तात्रेय भगवान में शंकर का रूप भी था और शंकर के वाहक नंदी हैं. मंदिर में गुरुवार को अच्छी खासी भीड़ होती है. मंदिर की व्यवस्था में 3-4 लाख रुपया मासिक खर्च होता है. भक्त दिल खोलकर दान भी करते हैं और 10-12 लाख रुपया मंदिर चढ़ौत्री, दानपेटी एवं चंदा के रूप में प्रतिमाह आता है. कभी ज्यादा कभी कम भी हो जाता है. वास्तव में यह मंदिर शहर के गणेश टेकड़ी एवं तेलंगखेड़ी जैसे ‘अच्छे चलते हुए’ मंदिरों जैसा है, जहां भक्त हमेशा बने ही रहते हैं. 

फिल्मी हस्तियों के आकर्षण का केंद्र

वर्धा रोड स्थित साईं मंदिर न केवल नगरवासियों, बल्कि फिल्मी हस्तियों के लिए भी आस्था का केंद्र है. मंदिर निर्माण में भी इन कलाकारों ने अपना अमूल्य योगदान दिया है. नागपुर से ताल्लुक रखने वाले वी.एस. राव मुंबई के फेमस स्टूडियो में बतौर एडिटर काम करते थे. उनके जरिए जाने-माने अभिनेता धर्मेन्द्र, अभिनेत्री हेमामालिनी से साईं मंदिर का शिलान्यास हुआ. इसके लिए खास तौर पर धर्मेन्द्र, हेमामालिनी, फाइनेंसर श्यामकुमार श्रीवास्तव को आमंत्रित किया गया था. मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग जुटाने की दृष्टि से उनकी मौजूदगी में यशवंत स्टेडियम में म्युजिकल चैरिटी शो भी हुआ था. इससे लाखों रु. की योगदान राशि एकत्रित हुई थी.

अगले दिन सुबह 6 बजे धर्मेन्द्र और हेमामालिनी के हाथों मंदिर की नींव रखी गई. इसके बाद जब भी हेमामालिनी नागपुर आईं, मंदिर में आना नहीं भूलीं. यहां संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, गायिका लता मंगेशकर, अनुराधा पौड़वाल, कविता कृष्णमूर्ति, साधना सरगम, शास्त्रीय गायक पं. जसराज, गायक सुरेश वाड़कर, नितिन मुकेश, गुलाम मुस्तफा खान, कलाकार सुधीर दलवी आदि आ चुके हैं. मंदिर में अधिकांश कलाकारों के कार्यक्रम भी हुए हैं. 

सरकार बदली, 8 मंजिले मंदिर का प्लान भी ठंडे बस्ते में 

कुछ वर्ष पूर्व मंदिर का स्लैब जीर्ण होने से स्ट्रक्टरल आडिटर ने मंदिर का जीर्णोद्धार करने की सलाह दी थी. 28 नवंबर 2018 को हुई बैठक में मंदिर का जीर्णोद्धार करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया था. मंदिर का नया नक्शा आर्किटेक्ट अशोक मोखा ने तैयार किया था. 75 करोड़ की लागत से आठ मंजिला साईं मंदिर बनाने की योजना बनी थी. मंदिर का निर्माण इस ढंग से किया जाने वाला था कि मंदिर के सामने से गुजरने वाली मेट्रो में सवार यात्री भी साईंबाबा के दर्शन कर सके.

देश के सबसे ऊंचे और गुंबदाकार आठ मंजिल वाले मंदिर की ऊंचाई करीब 190 वर्गफीट तय की गई थी. राजस्थान के गुलाबी पत्थर से मंदिर का पुनर्निर्माण होने वाला था. तत्कालीन  मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के मंदिर की एफएसआई की रकम माफ करने और निर्माण में आर्थिक सहयोग के लिए पत्र लिखा गया था. साथ ही केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तथा शिर्डी संस्थान के अध्यक्ष डा. सुरेश हावरे से भी आर्थिक मदद मांगी गई थी. लेकिन उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में सरकार बदली और 8 मंजिले मंदिर का प्लान भी ठंडे बस्ते में चला गया.