Farmers protest

नागपुर. कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली सीमा पर चल रहे किसानों के आंदोलन को अब शहर के अन्य संगठनों की ओर से भी समर्थन जताया जा रहा है. गुरुवार को कुछ संगठनों ने अलग-अलग प्रदर्शन कर जहां केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ विरोध जताया, वहीं आवश्यकता पड़ने पर दिल्ली कूच करने की घोषणा भी कुछ संगठनों द्वारा की गई.

गुरुवार को राष्ट्रीय नागपुर कार्पोरेशन एम्प्लाइज एसोसिएशन (इंटक) व नागपुर जिला इंटक की ओर से जमकर धरना प्रदर्शन किया गया, जिसमें संगठन के अध्यक्ष सुरेन्द्र टिंगने, रंजन नलोडे, प्रवीण तंत्रपाले, ईश्वर मेश्राम, बाबा श्रीखंडे, संजय मोहले, अभय अप्पनवार, बलीराम शेंडे, दत्तात्रय डहाके, पुरुषोत्तम कैकाडे, मारोती नासरे, अरुण तुर्केल, संजय गटकिने, कुणाल यादव, सुषमा नायडू आदि ने हिस्सा लिया.

कृषि की जड़ें होंगी खोखली

कांग्रेस की प्रभाग 15 इकाई की ओर से भी संविधान चौक पर धरना प्रदर्शन किया गया, जिसमें हिस्सा लेनेवाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना था कि केंद्र के इस काले कृषि कानून के खिलाफ लंबे समय से केंद्रीय नेतृत्व राहुल गांधी की ओर से विरोध जताया जा रहा है. किंतु शुरुआती दौर में देश की जनता ने इसे हलके में लिया है. इस काले कानून से कृषि प्रधान देश की कृषि की जड़ें ही खोखली हो जाएंगी. यदि किसान बचेगा तो देश बचेगा. इसे  देश की जनता ने समझना चाहिए.

भले ही लड़ाई किसान लड़ रहे हों, लेकिन जनता को इसे अपनी लड़ाई बनाना चाहिए. धरना प्रदर्शन में अधि. अक्षय समर्थ, पूर्व पार्षद राजेश जरगर, राजकुमार कामनानी, विजय सूर्यवंशी, बाबूलाल साहू, सूरज शर्मा, शेखर लसुनते, उमेश चव्हाण, अजय सूर्यवंशी, सोनू कुरवाने, श्यामसुंदर भगत, लव मसराम, कुश मसराम, जयप्रकाश जान, शुभम बनोदिया, सतीश फतेसिंह, तुकाराम लिल्हारे, संदीप गुव्हे, सुदाम जायसवाल, बंटी तली, विजय मेश्राम ने हिस्सा लिया.