Auto Rickshaw, Pollution
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  • सिटी को प्रदूषण मुक्त बनाने तेजी से हो अमल
  • 17000 आटो हैं पेट्रोल वाले
  • 50 फीसदी केरोसिन का करते उपयोग

नागपुर. शहर में वाहनों की बढ़ती भीड़ के कारण हो रहे प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए पुणे की तर्ज पर सिटी के सारे आटो और सिटी बसों को सीएनजी में अनिवार्य रूप से कनवर्ट करने की बेहद जरूरत है. सिटी में कितना प्रदूषण है इसका अहसास लोगों को कोरोना लाकडाउन के दौरान स्वच्छ हुए वातावरण और आज की फिर बन चुकी स्थिति से जरूर हो रहा होगा. सिटी में चलने वाली सिटी बसों को केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बायो सीएनजी में बदलने के साथ ही मनपा के सारे वाहनों, सिटी के सभी आटो को बायो सीएनजी करने की बात बार-बार की है.

वे खुद चाहते हैं कि डीजल-पेट्रोल से चलने वाले वाहन या तो बायोफ्यूल से चलाई जाएं ताकि प्रदूषण कम से कम हो या फिर वाहनों को इलेक्ट्रिय वाहनों में परिवर्तित किया जाए. उनके प्रयासों से अब कंपनियों ने इलेक्ट्रिक वाहन भी बड़े पैमाने पर बनाने शुरू कर दिये हैं.

फिलहाल तो सिटी में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सारे आटो व सिटी बसों को ही सीएनजी करने की सख्त जरूरत हैं. जिस तरह पुणे में सारे आटो व सिटी बसें सीएनजी पर ही चल रही हैं. वैसा ही नागपुर में भी होना चाहिए. इसके लिए प्रभावशाली कदम तत्काल उठाए जाने चाहिए. शहर में वर्तमान में 17000 से अधिक आटो चल रहे हैं. इसके अलावा 250 के करीब डीजल वाली सिटी बस जहरीला धुंआ उड़ाते हुए शहर की आबोहवा खराब कर रही हैं.

केरोसिन का कर रहे उपयोग

शहर में 17000 आटो चल रहे हैं जिसमें से करीब 50 फीसदी आटोचालक पेट्रोल में केरोसिन मिलाकर चला रहे हैं. जिसके चलते आटो से धुंआ अधिक निकलता है और आटो के साउंड में भी काफी अंतर आ जाता है. अनेक टू-स्ट्रोक आटो को तो प्योर केरोसिन से ही चलाया जा रहा है. संबंधित विभागों द्वारा किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने के कारण उनके हौसले बढ़े हुए हैं और बेखौफ शहर की आबोहवा को खराब कर रहे हैं. शहर सीमा में थ्रीसीटर आटो को ही आरटीओ ने अनुमति दी है.

सिक्स सीटर आटो को ग्रामीण भागों के लिए परमिट दिया जाता है. बावजूद इसके, सिक्स सीटर और एपे बड़ी संख्या में शहर के भीतर बाजार क्षेत्रों में डीजल का धुंआ उड़ाते नजर आते हैं. जिम्मेदार विभाग इन पर भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. अनेक आटोचालकों का कहना है कि शहर में प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से अगर सारे आटो को बायो सीएनजी किया जाता है तो हम इसका स्वागत करेंगे. पेट्रोल या डीजल से होने वाले प्रदूषण से शहर को कुछ हद तक तो बचाया ही जा सकेगा. 

कदम उठाने जरूरी

शहर में बढ़ते प्रदूषण के चलते पर्यावरण को खतरा बढ़ता ही जा रहा है. शहर में लगातार पेट्रोल व डीजल से चलने वाले वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है. बायो सीएनजी आटो के लिए जल्द कदम उठाये जाने चाहिए साथ ही सारे सिटी बसों को भी सीएनजी करना चाहिए. ग्रीन बस भी पर्याय हैं लेकिन वे सारे एक साथ लाए जाने चाहिए. अभी से कदम उठाए गये तो भविष्य के लिए अच्छा होगा.

हालत यह है कि किसी चौराहे से अगर केरोसीन की जहरीला धुंआ उड़ाते हुए कोई आटो गुजरता है तो भी उसे ट्राफिक पुलिस नहीं रोकती है. ऐसे वाहनचालकों के खिलाफ ट्राफिक विभाग, आरटीओ और राजस्व विभाग को भी कार्रवाई करने का अधिकार है लेकिन वर्षों से किसी विभाग ने कार्रवाई नहीं की है. होना तो यह चाहिए कि तीनों विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई करें.