Recruitment of vacant posts in Anganwadi soon
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    नागपुर. शहरी बच्चों की उम्र 2 वर्ष हुई नहीं कि पैरेन्ट्स उन्हें प्री-नर्सरी शालाओं में भेज देते हैं जहां वे तुतलाती भाषा में खेल-खेल में एबीसीडी व गिनती सीखने लगते हैं. यह उनके केजी क्लास की पूर्व तैयारी होती है. लेकिन ग्रामीण इलाकों के बच्चे ऐसी सुविधा से वंचित रहते हैं. उनके लिए आंगनवाड़ियां हैं जिसका संचालन महिला व बाल कल्याण विभाग द्वारा होता है.

    जिले में फिलहाल कुल 2161 आंगनवाड़ी हैं लेकिन यह दुर्भाग्य है कि उसमें से 371 के पास अभी भी खुद की इमारत नहीं है. जिसके कारण ये उधार की इमारतों या किराये के कमरों में संचालित की जा रही है. हालांकि पिछले पूरे एक वर्ष से कोरोना के चलते ये बंद ही रहीं हैं लेकिन विडंबना यह भी है कि 300 से अधिक आंगनवाड़ियों में बच्चों के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है. एक ओर प्रधानमंत्री देशभर में स्वच्छता अभियान पर जोर दे रहे हैं. हर घर शौचालय का अभियान चलाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर छोटे-छोटे बच्चों के लिए आंगनवाड़ियों में शौचालय तक विभाग नहीं बनवा पाया है.

    निधि अटकी, काम लटका

    बीते 1 वर्ष से अधिक समय से सरकार को आंगनवाड़ी इमारत निर्माण के लिए निधि ही नहीं मिलने की जानकारी अधिकारी दे रहे हैं. उनका कहना है कि मंजूरित निर्माण कार्य भी कोरोना संकट के चलते लटक गया है. जितनी इमारतों की जरूरतें है उसका प्रस्ताव भेजा गया है और हर वर्ष एक निश्चित निधि मिला करती है जिससे निर्माण कार्य किया जाता है. बताते चलें कि 5 वर्ष पूर्व तक केवल 1220 के पास स्वतंत्र इमारतें थीं और तब दावा किया गया था कि 2018 तक सभी की खुद की इमारतें होंगी लेकिन आज भी 1790 ही खुद की इमारतें हैं. बीते 3 वर्षों में कार्य कछुआ गति से चल रहे हैं. अधिकारी ने बताया कि डीपीसी निधि से इमारत निर्माण के लिए निधि की मांग की गई है. 

    कई तरह की अड़चनें

    विभाग के अधिकारी ने बताया कि जिले में कुछ आंगनवाड़ियों का निर्माण कई कारणों से अटका हुआ है. कुछ गांवों में जमीनें उपलब्ध नहीं हुई तो कुछ गांव पुर्नवसन की प्रक्रिया में भी हैं. फिलहाल की स्थिति में 157 किराये की इमारत में चल रहे हैं. निजी इमारतों में 21 और दूसरी शालाओं में 87 आंगनवाडियों को संचालित किया जा रहा है. समाज मंदिरों में 51 और ग्राम पंचायत की भवनों में 23 व अन्य इमारतों में 32 आंगनवाड़ियां संचालित हो रही हैं. 325 में तो बच्चों के लिए शौचालय तक नहीं हैं. 

    262 मिनी आंगनवाड़ी

    जिले में 262 मिनी आंगनवाड़ी हैं जिसमें केवल 39 के पास खुद की इमारत हैं. 223 दूसरे भवनों में संचालित की जा रही हैं. इसमें 49 किराये के कमरों में, 119 दूसरी शालाओं में, 33 समाज मंदिरों में, 4 ग्राम पंचायत भवनों, 4 अन्य इमारतों में संचालित हो रही है. 166 में तो शौचालय भी नहीं है.