एक और कंपनी ने निवेशकों का पैसा डुबाया

  • शहर के 325 ग्राहकों को 47 लाख का चूना

नागपुर. अब तक कई कंपनियां शहर के नागरिकों को निवेश पर भारी मुनाफा देने के नाम पर ठग चुकी है. कुछ कंपनियां नागपुर की है तो कुछ अन्य राज्यों की. करोड़ों रुपये का चूना अब तक शहर के नागरिकों को लग चुका है. फिर भी लोग निजी कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले झूठे आश्वासनों में फंस जाते है. ऐसे ही एक और माइक्रो फायनान्स कंपनी ने लोगों को चूना लगाया. शिकायत क्राइम ब्रांच की आर्थिक आपराध अन्वेषण शाखा को मिली और जांच के बाद लकड़गंज पुलिस ने मामला दर्ज किया.

पुलिस ने टेलीफोन एक्सचेंज चौक के एबीसी टावर में स्थित माइक्रो फायनान्स प्रा. लि और माइक्रो लिजिंग एंड फंडिंग लि. के संचालक अशोककुमार पटनायक, दुर्गाप्रसाद मिश्रा, वैंकुठनाथ पटनायक, उपेंद्रनाथ पटनायक सहित संचालक मंडल, अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इस कंपनी का मुख्य कार्यालय ओड़ीसा में है. दुर्गानगर, भरतवाड़ा रोड निवासी पिंकी गंगाराम पनपेले (30) की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया.

एजेंट के माध्यम से वसूला पैसा
वर्ष 2012 में कंपनी के संचालयकों ने नागपुर में अपना कार्यालय खोला. एजेंटों की नियुक्ति की गई. उनके माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों में कंपनी का प्रचार किया गया. नकद निवेश पर 2 वर्ष में रकम दुगनी करने का भरोसा दिलाया गया. कंपनी ने रोज कमाने और खाने वालों पर ध्यान केंद्रित किया. मुनाफे का लालच देकर रकम निवेश करवाई गई. पिंकी की तरह शहर के 325 नागरिकों को फंसाया गया. शुरुआती दौर में कंपनी ने लोगों को पैसा दिया, लेकिन बाद में रकम मिलना बंद हो गई. कुछ समय बाद कंपनी ने अपना कार्यालय ही बंद कर दिया. सारे एजेंट भी भाग निकले. पिंकी सहित अन्य निवेशकों के 47 लाख रुपये डूब गए. पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की. 

भुवनेश्वर में भी दर्ज है मामला 
डीसीपी श्वेता खेड़कर के मार्गदर्शन में एपीआई अमर कळांगे ने प्रकरण की प्राथमिक जांच कर लकड़गंज थाने में मामला दर्ज किया. धोखाधड़ी के अलावा एमपीआईडी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. वैसे जानकारी मिली है कि दिसंबर 2018 में ही सेबी ने इस कंपनी के आर्थिक व्यवहार पर रोक लगाकर सारे अकाउंट सीज करने के आदेश दे दिए थे. केवल नागपुर ही नहीं ओड़ीसा में पहले ही कंपनी के संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है. वहां प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. बताया जाता है कि कंपनी ने करीब 30 हजार निवेशकों को 200 करोड़ रुपये का चूना लगाया है. कंपनी के संचालक दुर्गप्रसाद मिश्रा की गिरफ्तारी पहले हो चुकी है.