बिनेकर हत्याकांड: 4 गिरफ्तार

  • दोस्तों ने उक्साया, लिया पिता की हत्या का बदला

नागपुर. भोले पेट्रोल पंप चौक पर शनिवार को दिनदहाड़े हुई अपराधी बाल्या उर्फ किशोर बिनेकर की हत्या के मामले में क्राइम ब्रांच को 4 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली. 1 आरोपी को शनिवार रात ही गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि अन्य 3 को रविवार की सुबह रामटेक थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया. पकड़े गए आरोपियों में बारा सिग्नल, इमामवाड़ा निवासी चेतन सुनील हजारे (30), रजत राजा तांबे (22), आसिम विजय लुडेरकर (28) और इंदिरानगर निवासी भारत राजेंद्र पंडित (22) का समावेश है.

झिंगाबाई टाकली निवासी अनिकेत उर्फ अभिषेक माथनवार नामक आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. उसकी तलाश में पुलिस दल जुटे हुए है. चेतन के खिलाफ हत्या के प्रयास के 2 और लूटपाट के मामले दर्ज है. उसके पिता सुनील हजारे भी अपराधी थे. वर्ष 2011 में बाल्या और उसके साथियों ने सुनील हजारे और उसके साथी की हत्या की थी. उस समय चेतन महज 11 वर्ष का था. कम उम्र से ही वह भी आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय हो गया.

अपने रिकार्ड का हवाला देकर वह दोस्तों में दबदबा बनाने की कोशिश करता था, लेकिन हर बार उसे दोस्त यह कहकर शांत करवा देते थे कि तू अपने पिता के हत्यारे का कुछ बिगाड़ नहीं पाया. दोस्त चेतन को इस कदर चिढ़ाने लगे थे कि उसके दिमाग में केवल बाल्या की हत्या की साजिश चलती थी. 10 दिनों की प्लानिंग के बाद शनिवार को चेतन ने अपने साथियों के साथ मिलकर बाल्या को मारने का प्लान बनाया. भोले पेट्रोल पंप पर भरे चौराहे में उसे मौत के घाट उतारा गया.

हत्या के बाद भी मचाने वाले थे उत्पात
सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में साफ दिख रहा है कि आरोपी बाल्या को ढेर करने के बाद उसकी कार में सवार हुए. कार शुरु नहीं हुई और आरोपियों को अपने दुपहिया वाहनों से भी भागना पड़ा. असल में आरोपियों का प्लान हत्या के बाद उत्पात मचाने का था. सभी ने शराब पी रखी थी. बाल्या को मारने के बाद आरोपी लालगंज परिसर में स्थित बाल्या के घर के पास भी उत्पात मचाने वाले थे, लेकिन कार शुरु नहीं हुई. हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी कहां-कहां गए इसका पता लगाया जा रहा है. उनसे हथियार और खून से सने कपड़े जब्त होना बाकी है.

अंतिम यात्रा में उमड़ा हुजूम
बाल्य की हत्या की खबर से पूरे शहर में खलबली मच गई. बाल्या जुआ अड्डे चलाता था इसीलिए सभी प्रकार के लोगों से उसके संबंध थे. लालगंज परिसर में वह उभरते हुए नेता की तरह आगे बढ़ रहा था. 2 नंबर की कमाई से समाजसेवा भी करता था. रविवार को उसकी अंतिमयात्रा में लोगों का हुजूम उमड़ गया. कोरोना का संक्रमण तेज होने के बावजूद उसकी अंतिमयात्रा में करीब 2000 लोग शामिल हुए. ऐसे समय में भीड़ पर नियंत्रण करना पुलिस के लिए संभव नहीं था. परिसर में माहौल न बिगड़े इसीलिए पुलिस ने अंतिमयात्र में हस्तक्षेप नहीं किया.