Balya Binekar Murder, Kishor Binekar Murder, Nagpur

  • चेतन ने लिया पिता की हत्या का बदला

नागपुर. शहर में जुआ क्लब चलाने को लेकर चर्चित अपराधी बाल्या उर्फ किशोर एकनाथ बिनेकर (41) की शनिवार को दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. भोले पेट्रोल पंप चौक पर हुई इस वारदात से पूरे शहर में खलबली मच गई. 2 दुपहिया वाहनों पर सवार 5 हमलावरों ने सिग्नल पर ही बाल्या की कार को अड़ा लिया. कुल्हाड़ी और चाकू से उसके शरीर को गोद दिया. इस समय चौराहे पर काफी भीड़ थी. बाल्या को मौके पर ही मौत के घाट उतारने के बाद आरोपी फरार हो गए. इस हत्या में चेतन हजारे, रजत तांबे, आस्मिन और 2 अन्य का समावेश है. चेतन हजारे 90 के दशक में चर्चित रहे सुनील हजारे का बेटा है. बाल्या ने अपने साथियों के साथ मिलकर वर्ष 2001 में सुनील हजारे और उसके 1 साथी की हत्या कर दी थी. चेतन ने बाल्या को मारकर अपने पिता की हत्या की हत्या का बदला लिया. वैसे इमामवाड़ा के अशोक चौक के क्लब को लेकर भी विवाद होने की जानकारी मिली है.

सिग्नल पर ही अड़ा ली कार
बाल्या वैसे तो लालगंज नाइक तालाब परिसर का रहने वाला है. लंबे समय से वह परिसर में जुआ अड्डा चला रहा है. पूरे घर को उसने क्लब बना दिया था और खुद अपने परिवार के साथ धरमपेठ के लांजेवार अस्पताल के समीप रहने चला गया था. शनिवार की शाम 4 बजे वह अपने घर से क्लब जाने के लिए निकला. घर से ही चेतन और उसके 4 साथियों ने दुपहिया वाहन पर बाल्या का पीछा शुरु कर दिया. भोले पेट्रोल पंप चौक पर सिग्नल की लाल बत्ती होने के कारण बाल्या ने गाड़ी रोकी. इसी दौरान बाइक पर सवार 2 आरोपियों ने गाड़ी अड़ा ली. अन्य दुपहिया वाहन पर सवार 3 आरोपियों ने रास्ते के किनारे अपनी गाड़ी पार्क की. इससे पहले कि बाल्या कुछ समझ पाता एक आरोपी ने कुल्हाड़ी से ड्राइवर सीट का कांच फोड़ दिया. अन्य आरोपियों ने हथियारों से दूसरी तरफ का कांच फोड़ा. बाल्या ने बचने का काफी प्रयास किया, लेकिन दोनों तरफ से हो रहे वारों को रोक नहीं पाया. आखिर कार का दरवाजा खोलकर भागने की कोशिश की, लेकिन पांचों आरोपी उसपर टूट पड़े. 

कार लेकर भागने का था प्लान
बाल्या के कार से बाहर निकलते ही चाकू और कुल्हाड़ी से आरोपियों ने कई वार किए. आरोपी जानते थे कि यदि बाल्या बच गया तो उनकी मौत पक्की है. इसीलिए आरोपी तब तक वार करते रहे जब तक बाल्या ने दम नहीं तोड़ दिया. आरोपियों के पास कट्टा भी दिखाई दिया, लेकिन फायर नहीं किया गया. बाल्या को ढेर करने के बाद 2 आरोपी दुपहिया वाहन लेकर भागे. अन्य 3 उसकी कार लेकर भाग रहे थे, लेकिन गाड़ी खराब होने के कारण आरोपी अपने ही वाहन में सवार होकर भागे. घटना की जानकारी मिलते ही डीसीपी विनीता शाहू, गजानन राजमाने, एसीपी सुधीर नंदनवार, विजय मराठे और इंस्पेक्टर जग्वेंद्र राजपूत अपने दल के साथ मौके पर पहुंच गए. चौराहे पर लगे सीओसी के कैमरे में पूरा घटनाक्रम कैद हुआ.

क्लब को लेकर भी चल रहा था विवाद
बाल्या के पिता एकनाथ बिनेकर का लालगंज परिसर में एकनाथ सावजी हुआ करता था. वहां अपराधी सुनील हजारे अपने साथियों के साथ दादागिरी करता था. सुनील का उत्पात बढ़ता देख 2001 में बाल्या ने अपनी चिल्लर गैंग के साथ मिलकर सुनील की हत्या की. उस समय बाल्या महज 16 वर्ष का था. न सिर्फ सुनील को बल्कि उसके साथी को भी मौत के घाट उतारा था. इस हमले में 1 की जान बच गई थी. तब से बाल्या के नाम की दहशत बन गई थी. बताया जाता है कि अशोक चौक पर चल रहे एक क्लब को लेकर बाल्या का मूलचंद और उसके बेटे से विवाद चल रहा था. पुलिस ने दोनों पर प्रतिबंधक कार्रवाई कर आगे विवाद न करने की चेतावनी दी थी. बाल्या को रास्ते से हटाने के लिए पिता-पुत्र द्वारा प्लानिंग किए जाने की जानकारी मिल रही है.