बिहार चुनाव में BJP का शानदार जीत, NDA में बढ़ा देवेन्द्र का कद

  • बने मैन आफ द मैच

नागपुर. सुपर ओवर तक खींचें बिहार चुनाव में एनडीए को मिली जीत में भारतीय जनता पार्टी को बिग ब्रदर की भुमिका में लाने वाले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस मैन आफ द मैच रहे. मोदी, अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें बिहार चुनाव के लिए पार्टी की ओर चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया था. उन्होंने इस विश्वास को कायम रखा और 2015 की हार का गम इस बार दमदार जीत के साथ कोसों पीछे ठकेल दिया.

वर्ष 2015 के विधानसभा चुनावों में मोदी लहर के बावजूद में मात्र 53 सीट हासिल करने वाली भाजपा ने 2020 में रिकार्ड प्रदर्शन करते हुए 74 सीटें हासिल की और एनडीए को 125 सीटों के साथ बहुमत दिलाने में मुख्य भुमिका निभाई. यहां तक मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की जेडीयू भी 43 सीटों पर ही थम गई. 

बेस्ट सीट मैनेजमेंट, 21 दिन के बिहारी

बिहार चुनावों की घोषणा से 3-4 महीनें पहले ही उन्हें संकेत मिले गये थे और वे तैयारियों में जूट गये. सीएम नीतिश कुमार और अन्य नेताओं के साथ सीटों के बंटवारे से लेकर प्रचार, कार्यकर्ताओं के प्रबंधन पर काम किया. वे पोल मैनेजर बनकर 21 दिनों तक लगातार बिहार में टीके रहे. हालांकि अंतिम दौर में उन्हें कोरोना हो गया और हास्पिटल में भर्ती हो गये. लेकिन हास्पिटल से भी ऑनलाइन तरीके से बिहार के भाजपा प्रत्याशियों, पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं आदि से जुड़े रहे और अपनी उपस्थिति दर्शाते रहें. 

केदार, पांडे को पछाड़ा

एनडीए का असली मुकाबला आरजेडी और कांग्रेस नीत महागठबंधन से था. कांग्रेस ने चुनाव प्रभारी के तौर पर देवेन्द्र के मुकाबले में महाराष्ट्र के ही क्रीड़ा व युवा कल्याण मंत्री सुनील केदार और अविनाश पांडे को जिम्मेदारी सौंपी. लेकिन यह दोहरी चुनौती भी देवेन्द्र के तिलिस्म को भेद नहीं सकी. नतीजा सभी के सामने हैं.

करीब एक दशक पूर्व बीजेपी ने बिहार चुनाव के लिए हैवीवेट राष्ट्रीय नेता नितिन गडकरी को कमान सौंपी थी. उनका सामना कांग्रेस मुकुल वासनिक से था. हालांकि देवेन्द्र को पहली बार बिहार जैसे राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जहां चुनाव किसी भी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के लिए प्रतिष्ठा के चुनाव होते हैं. उन्होंने अपने वरिष्ठ नेताओं का विश्वास कायम रखा. देवेन्द्र इससे पहले गोवा, गुजरात समेत अन्य राज्यों में भी अपना करिश्मा दिखा चुके हैं.

PM मोदी की सभाओं का बेहतरीन नियोजन

बिहार चुनावों में सबसे बड़ा चुनौती भरा काम था प्रधानमंत्री मोदी की प्रचार सभा का नियोजन. देवेन्द्र ने स्वयं 10 जनसभाएं की और पीएम मोदी की 12 जनसभाओं की जिम्मेदारी बखुबी संभाली. बताया जा रहा है कि पहले दौर में तेजस्वी यादव के जोर को पीएम मोदी की सभाओं ने फीका किया. इसके पीछे देवेन्द्र का सभा नियोजन ही रहा. वे अधिकांश समय ऑनलाइन रहते हुए भी अपने काम को अंजाम देते रहे. इसमें कोई दोराय नहीं कि बिहार चुनावों में की गई उनकी व्यूह रचना ने बीजेपी समेत एनडीए के सभी दिग्गज नेताओं को भी मुरीद बना दिया है.