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  • नागपुर छोड़ विदर्भ के सभी जिलों में स्कूल खुले

नागपुर. एक ओर जहां कोरोना का संकट एक बार फिर बढ़ते जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने ‘प्रयोग’ के तौर पर स्कूलें खोल दिये हैं. स्कूलों में 50 फीसदी से भी कम उपस्थिति है. पालक बच्चों को स्कूल भेजकर रिस्क नहीं लेना चाहते. वहीं शिक्षक और स्टाफ के मन में भी डर बना हुआ है. वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठने लगे है कि जब बोर्ड की पढाई पूरे राज्यभर के लिए एक समान है तो फिर स्कूल खोलने की तिथि को आगे-पीछे क्यों किया जा रहा है.

मुंबई, नासिक, औरंगाबाद सहित कुछ अन्य शहरों में दिसंबर तक स्कूल शुरू नहीं होने वाले हैं. नागपुर में 13 दिसंबर तक स्कूलों को बंद रखा जाएगा. वहीं ग्रामीण भागों में 26 नवंबर को समीक्षा करने के बाद निर्णय लिया जाएगा. स्टेट बोर्ड की स्कूलों में अब तक छात्रों को आन लाइन लर्निंग के माध्यम से पढाया जा रहा है. लेकिन इसमें भी करीब 50 फीसदी छात्र ही हिस्सा ले रहे हैं. वहीं सिलेबस भी अब तक आधा नहीं हो सका है. 10वीं में 20-20 अंकों से प्रैक्टिकल, मौखिक परीक्षा होती है. अब तक इसका भी स्वरुप तय नहीं हो सका है. पालकों के मन में तमाम तरह के सवाल है, जिनके जवाब शिक्षकों के पास भी नहीं है. ऑन लाइन पढ़ाई के माध्यम से ग्रामीण भागों के सभी छात्रों को पढ़ाना शिक्षकों के मुश्किल हो गया है. अब दिसंबर का महीना आने वाला है. वहीं कोरोना की सेकेंड वेव की संभावना भी व्यक्त की जा रही है. यही वजह है कि सरकार द्वारा बोर्ड के छात्रों के बारे में तत्काल निर्णय लिया जाना चाहिए. 

शहर से ग्रामीण में जा रहे शिक्षक

पालकों का कहना है कि एक ही राज्य में स्कूल खोलने का अलग-अलग निर्णय समझ से परे है. शिक्षकों को निर्धारित समय में सिलेबस पूरा करना होता है. लेकिन अब भी कई शिक्षक एेसे है जो शहरों में रहते हैं और हर दिन जिले की अन्य स्कूलों में आना-जाना करते हैं. केवल जिले में ही नहीं बल्कि नागपुर में रहने वाले अनेक शिक्षक वर्धा, गोंदिया, चंद्रपुर तक हर दिन आना-जाना करते हैं. इस माध्यम से भी कोरोना के प्रसार से इंकार नहीं किया जा सकता. विदर्भ के सभी जिलों में स्कूलें शुरू कर दी गई है. लेकिन नागपुर शहर और जिले के छात्रों को कुछ दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है. पालकों का कहना है कि सरकार को पूरे राज्य के लिए एक समान निर्णय लेना चाहिए. इससे भविष्य में दिक्कतें आ जाएगी. कुछ स्कूलों में सिलेबस पूरा नहीं हो सकेगा. लेकिन बोर्ड द्वारा तो पूरे राज्यभर के लिए एक समान तरीके से परीक्षा ली जाएगी. यही वजह है कि सरकार द्वारा नीति स्पष्ट करने की मांग जोर पकड़ने लगी है. 

सीबीएसई ने कर ली तैयारी

सीबीएसई स्कूलों में जून से ही आनलाइन क्लासेस चल रही है. अब तक सिलेबस आधे से अधिक पूरा भी हो गया है. जनवरी से बाद 9वीं के छात्रों की 10 वीं की पढाई भी शुरू हो जाएगी. सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने पिछले ही दिनों स्पष्ट कर दिया था कि 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं जरुर ली जाएगी. इसके लिए जल्द ही कार्यक्रम की घोषणा की भी बात कही हैं. परीक्षा का पैटर्न कैसे होगा यह जनवरी के बाद ही तय हो सकेगा. लेकिन हर वर्ष फरवरी-मार्च में होने वाली परीक्षा इस बार 1-2 महीने देरी से होगी. इस तुलना में स्टेट बोर्ड की तैयारी कुछ भी नजर नहीं आ रही है.