प्रभारी के भरोसे चल रहा बोर्ड – अध्यक्ष व सचिव दोनों पद खाली

  • 06 जिलों की जिम्मेदारी 
  • 04 वर्षों से नियमित अध्यक्ष नहीं 

नागपुर. 10वीं व 12वीं की परीक्षा का नियोजन करने करने वाले विभागीय शिक्षा मंडल का कामकाज प्रभारी के भरोसे चल रहा है. पिछले 4 वर्षों से अध्यक्ष का पद खाली है. पिछले दिनों सचिव रविकांत देशपांडे के सेवानिवृत्त होने के बाद अब अध्यक्ष व सचिव दोनों पद खाली हो गए हैं. अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है. 

रविकांत देशपांडे के निवृत्त होने के बाद विभागीय शिक्षा उपसंचालक अनिल पारधी को बोर्ड के अध्यक्ष का अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया है. पारधी अमरावती बोर्ड के सचिव पद की नियमित जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहे हैं. अब उनके पास विभागीय शिक्षा उप संचालक के साथ ही बोर्ड के अध्यक्ष की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है. नागपुर बोर्ड में कार्यरत सहसचिव माधुरी सावरकर को बोर्ड के सचिव पद का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है.

6 जिलों के स्कूलों में बोर्ड की परीक्षा संचालित कराने की योजना बनाने वाले बोर्ड में अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर शुरुआत से ही लापरवाही बरती गई. बोर्ड द्वारा वर्षभर परीक्षाओं से संबंधित कार्य किए जाते हैं. इस बार कोरोना की वजह से बोर्ड के सामने परीक्षाएं सम्पन्न कराना भी एक चुनौती थी. उल्लेखनीय है कि २०१६ में बोर्ड के अध्यक्ष संजय गणोरकर सेवानिवृत्त हुए. उसके बाद से नियमित अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है. 

उप शिक्षाधिकारी के 20 पद खाली 

बोर्ड के साथ ही विभागीय शिक्षा उप संचालक भी प्रभारी ही हैं. इस वजह से 6 जिलों के नियोजन में दिक्कतें आ रही हैं. शिक्षकों और स्कूलों के प्रलंबित मामलों की फाइलों का अंबार लगा हुआ है. विभाग में शिक्षाधिकारी के १२ पदों में से ५ प्रभारी और उप शिक्षाधिकारी के २५ पदों में २० पद खाली हैं. वहीं गट शिक्षाधिकारी के ६3 पदों में से ५3 रिक्त हैं. एक-एक अधिकारी पर 2 से अधिक पदों की जिम्मेदारी होने का ही नतीजा है कि विभाग के शिक्षा विभाग में लेटलतीफी का आलम है.

मुंबई और पुणे के बाद नागपुर बोर्ड में सबसे अधिक छात्र बोर्ड की परीक्षा में बैठते हैं. इसके बावजूद सरकार द्वारा अधिकारियों की नियुक्ति में देरी की जा रही है. शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग को लेकर बरती जा रही लापरवाही सरकार की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करती है.