Cancer
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  • आरएसटी कैंसर अस्पताल में स्तन कैंसर जागरुकता सप्ताह

नागपुर. लॉकडाउन के दौरान सब कुछ बंद होने से कैंसर के मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा. परिणाम स्वरुप पहले चरण वाले मरीज दूसरे और दूसरे चरण वाले मरीज तीसरे चरण में पहुंच गये. विदर्भ में स्तन के कैंसर के अधिकांश मरीज दूसरे और तीसरे चरण में ही उपचार के लिए आते हैं. यही वजह है कि बीमारी से बचने के लिए सेल्फ एक्जामिन आवश्यक है. यह जानकारी आरएसटी कैंसर अस्पताल के अतिरिक्त निदेशक डा प्रकाश वाकोडे ने दी. अस्पताल की ओर से स्तन कैंसर जागरुकता माह के तहत जनजागृति कार्यक्रम चलाया जा रहा है.

डा बीके शर्मा ने बताय कि भारत में हर वर्ष 10000 से अधिक नए स्तन कैंसर रोगियों का निदान किया जाता है. शहरी क्षेत्रों में 30 में से 1 और ग्रामीण क्षेत्रों में 60 में से 1 महिला में जीवनकाल में स्तन कैंसर विकसित होने की संभावना रहती है. महिलाओं में सभी कैंसर का 30 फीसदी से अधिक स्तन कैंसर है. देश में 50 प्रतिशत मरीज बीमारी के दूसरे और तीसरे चरण में इलाज के लिए आते हैं. केवल 5 फीसदी ही मरीज होते हैं जो पहले चरण में आते हैं. 

तेजी से बढ़ रहे मरीज

डा प्रफुल्ल चाहंदे, डा सुधीर देशमुख ने बताया कि अर्ली स्टेज में उपचार मिलने से बीमारी पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है. शुरूआत में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण नहीं दिखाई देते. जीवनशैली में बदलाव, व्यायाम की कमी भी ब्रेस्ट कैंसर का कारण हो सकता है. राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत में अनुमानित कैंसर के मामले 223832 हो जाएगे.

यह वजह है कि लोगों में बीमारी को लेकर जागरुकता जरुरी है. समय-समय पर स्क्रीनिंग भी आवश्यक है. लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद होने से कैंसर के मरीज समय पर उपचार कराने में असमर्थ रहे. इस वजह से बीमारी की तीव्रता बढ़ी है. अस्पताल की ओर से सहूलियम दर में ब्रेस्ट कैंसर जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.