Fire in Forest, Deori, Gondia
File Photo

  • जंगलों में आग लगने का मामला फैल रहा तेजी से
  • सिटी के अंदर सेमिनरी हिल्स में सूखे पत्ते का फैलाव, बरतें सावधानी

नागपुर. पतझड़ का मौसम और तेज गर्मी की वजह से आगजनी की घटनाएं आम बात होती है. ऐसे में आग को रोकने के लिए काफी सावधानी बरतने की जरूरत होती है. खासकर जब शहर के बीच में जंगल हो तो विभाग को और ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत होती है. महानगर में सेमिनरी हिल्स पर मौजूद जंगल में इनदिनों सूखे पत्ते का फैलाव चारों तरफ है. तेज हवाओं के साथ तेज धूप भी है, ऐसे में आग का खतरा और अधिक बढ़ जाता है. लेकिन किसी भी अनहोनी या आग लगने की स्थिति के लिए विभाग को पहले से ही तैयार होने की जरूरत है. वन विभाग के अधिकारियों ने अभी तक ऐसी कोई प्लानिंग नहीं की है और न ही कोई ऐसी तैयारी की है, जिससे की कभी भी इस तरह की कोई घटना हो तो जंगलों को आग से बचाया जा सके.

आग से बचाव के लिए कोई प्लानिंग नहीं

सेमिनरी हिल्स में जंगल को ब्राउंडी कर रखा है. लेकिन जंगल के अंदर आम लोगों का आना-जाना है. पतझड़ के कारण सारे सूखे पत्ते जंगल में बिखरे हुए हैं. सावधानी की दृष्टि से विभाग के अफसरों ने अब तक कोई प्लानिंग नहीं की है. न ही कर्मियों की तैनाती की है, और न हीं जंगल में फैले प्लास्टिक और अन्य कचरों की साफ-सफाई की है. अंदर में काम करने वाले मजदूर सिगरेट पीते हैं, ऐसे में कोई अनहोनी न हो इसके लिए भी कार्रवाई करने की जरूरत है. हालांकि अधिकारी हमेशा ऐसे मुद्दों पर बात करने से बचते रहते हैं.  

गर्मियों में बढ़ जाती है आग की संभावना

जिले में गर्मी के दस्तक शुरू हो गई है. लोग रोजाना कहीं न कहीं कचरों में आग लगा ही देते हैं. गर्मी के साथ पतझड़ का मौसम आते ही प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों रूपों में वनों को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है. यह स्थिति मार्च से शुरू हो गई है. आए दिन कहीं न कहीं कचरों में आग लगाने की खबरें आती रहती है. गर्मियों में आग लगाने से रोकना होगा. कुछ दिन पहले जब सीताबर्डी में नाग नदी के अंदर पड़े कचरे में आग लगी थी तो उसे काबू पाने में भी 3 घंटे लग गए थे. 

करने होंगे ये उपाय

–  सीमित रूप में खरपतवार जलाना,

– वन सीमा को साफ रखना.

– वन विभाग के कर्मचारियों को गस्ती के लिए सुविधा उपलब्ध कराई जाए.

– आग पर निगरानी रखने के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारी नियुक्त किए जाने चाहिए.

– जंगल के पास ही एक फायर ब्रिगडे की गाड़ी हर वक्त खड़ी हो.

  – सीमित मात्रा में घास-फूस जलाने की सीमा रेखा का स्पष्ट रेखांकन. 

– आग जलाने के काम को नियन्त्रित किया जाना चाहिए जिससे जंगल में पेड़ से गिरी पत्तियां इकट्ठी न होने पाए.

इन कारणों पर ध्यान देने की जरूरत

जंगल में आग लगने के मुख्य तीन कारण होते हैं. ईंधन, ऑक्सीजन और गर्मी. अगर गर्मियों का मौसम है तो सूखा पड़ने पर ट्रेन के पहिए से निकली एक चिंगारी भी आग लगा सकती है. इसके अलावा कभी-कभी आग प्राकृतिक रूप से भी लग जाती है. ये आग ज्यादा गर्मी की वजह से या फिर बिजली कड़कने से लगती है. वैसे जंगलों में आग लगने की ज्यादातर घटनाएं इंसानों के कारण होती हैं, जैसे आगजनी, कैम्प फ़ायर बिना बुझी सिगरेट फेंकना, जलता हुआ कचरा छोड़ना, माचिस या ज्वलनशील चीजों से खेलना आदि. जंगलों में आग लगने के मुख्य कारण बारिश का कम होना, सूखे की स्थिति, गर्म हवा, ज्यादा तापमान भी हो सकते हैं. इन सभी कारणों से जंगलों में आग लग सकती है.

छत्तीसगढ़ के जंगल में लगी आग हो रही बेकाबू

गर्मी शुरू होते ही जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया. छत्तीसगढ़ जशपुर के कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित वन में दो दिन से जंगल जल रहा है. बताया जा रहा है कि छोटी सी आग की चिंगारी ने आज भयंकर रूप ले लिया है. जिसके कारण वहां अब आग बेकाबू हो चुका है. जिला मुख्यालय जशपुर सहित पूरे आठ ब्लॉकों के जंगल आग में झुलस रहे हैं. दिन रात आग में झुलस रहे जंगल में बड़े वृक्षों के साथ छोटे पौधे भी जल कर खाक हो रहे हैं. पड़ोसी राज्य में इस तरह की घटना से सबक लेते हुए यहां के अधिकारियों को अभी से ठोस प्लानिंग करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में यहां इस तरह की कोई घटना न हो.