ABVP pressure, university withdraws, refuses to give vice-chancellor speech in anti-naxal program

  • गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद फिर छिड़ी बहस

नागपुर. कोरोना के बढ़ते प्रादुर्भाव के बाद राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों की सभी परीक्षाएं रद्द कर दी थी. छात्रों पिछले सत्र के प्रदर्शन के आधार पर अंक देकर उनका परिणाम तैयार करना था. सरकार के आदेश के बाद कालेज सहित विवि परिणाम तैयार करने में भी जुट गया था. वहीं छात्र भी बेफिक्र हो गये थे. लेकिन एक बार फिर कंफ्युजन पैदा हो गया है. गृह मंत्रालय ने अनलॉक-2 में विश्वविद्यालयों सहित अन्य शिक्षा संस्थाओं को वार्षिक परीक्षाएं आयोजित कराने की अनुमति दे दी है. सभी परीक्षाओं के संबंध में यूजीसी और विवि के अकादमिक कैलेंडर के दिशा-निर्देश और केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा मंजूर मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार वार्षिक परीक्षाएं अनिवार्य की है. इस मंजूरी के बाद फिर एक बार बहस छिड़ गई है.

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेषज परीक्षा लिये जाने के पक्ष में है. वहीं कुछ परीक्षा नहीं लिये जाने की बात कर रहे हैं. परीक्षाओं को लेकर मार्च के महीने से ही अनिश्चितता बनी हुई है. पहले सरकार ने निर्णय लेकर सभी परीक्षाओं को रद्द कर दिया. इसके बाद राज्यपाल ने इस निर्णय पर सहमति नहीं दर्शाई थी. अब जब राज्य सरकार ने एक बार निर्णय घोषित कर दिया कि परीक्षाएं नहीं होगी. तब गृह मंत्रालय से मिली मंजूरी ने छात्रों को भी परेशानी में डाल दिया है. इस निर्णय के बार में अब तक आरटीएम नागपुर विवि को कोई अधिकृत जानकारी नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से कोई आदेश आने के बाद भी अगली कार्यवाही की जाएगी.

कोरोना काल में उचित नहीं: अभिजीत
इस संबंध में विवि के विविध प्राधिकरणों में कार्य करने वाले एड अभिजीत वंजारी ने बताया कि कोरोना काल में परीक्षा घातक हो सकता है. स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषजों ने सितंबर कोरोना का प्रभाव बढ़ने की संभावना व्यक्त की है. अंतिम वर्ष के साथ ही प्रथम व द्वितीय वर्ष की परीक्षा को लेकर अभी भी संभ्रम की स्थिति बनी हुई है. अधिकांश छात्र अपने-अपने शहर व गांव में चले गये हैं. अब क्या केंद्र सरकार गारंटी लेगी की छात्रों को संक्रमण नहीं होगा. परीक्षा और परिणाम सहित अनेक विषयों पर अब भी संभ्रम की स्थिति बनी हुई है. 

छात्र हित में निर्णय: मनमोहन
विवि के सीनेट सदस्य एड मनमोहन बाजपेयी ने बताया कि यह निर्णय छात्रों के हित में है. अंतिम वर्ष की परीक्षा लेने के बारे में पहले भी मांग की गई थी. छात्र हित को ध्यान में रखते हुए इस बारे में राज्यपाल को भी लिखित निवेदन दिया था. भले ही तिथि आगे बढ़ाई जाये लेकिन परीक्षा ली जानी चाहिए थी. अब गृह मंत्रालय ने परीक्षा लेने की अनुमति दे दी है. कोरोना के बढते प्रकोप को देखते हुए परीक्षा की तिथि और आगे बढ़ाई जा सकती है. 

सही फैसला: सेराम 
आरटीएम नागपुर विवि के प्रबंधन परिषद सदस्य दिनेश सेराम ने बताया कि छात्र हित में यूजीसी का निर्णय है. अंतिम वर्ष की परीक्षा होनी चाहिए.छात्रों के साथ ही पालक भी इस निर्णय से राहत महसूस करेगे. 

छात्र फिर संभ्रम में : डेकाटे 
सीनेट सदस्य प्रशांत डेकाटे ने बताया कि राज्य सरकार ने पहले ही अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी. लेकिन अब केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नये निर्णय से छात्र संभ्रम में पड़ गये हैं. विवि के सभी होस्टल में रहने वाले छात्र अपने-अपने गांव चले गये है. कुछ होस्टल को विवि ने क्वारंटाइन सेंटर बनाया है. इस हालत में परीक्षा कैसे ली जा सकती है यह गंभीर प्रश्न है.