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  • फीस नहीं देने पर बंद हो रही कक्षाएं, 50 प्रतिशत बच्चे पहले ही नहीं जुड़े

नागपुर. राज्य और केन्द्र सरकार की ओर से ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर कोई स्पष्ट नियम और फीस मापदंड आदि निर्धारित नहीं करने से अब स्कूलों की ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर कई उलझनें सामने आ गई हैं. तीन महीने की फीस भरने को लेकर अब स्कूलों और पालकों के बीच ठन गई है. स्कूलों ने फीस नहीं भरने वाले विद्यार्थियों को ऑनलाइन से कट कर दिया है. पालकों की मानें तो स्कूलों ने पहले बिना फीस ऑनलाइन शुरू करने को कहा था. लेकिन अब फीस को लेकर अड़ा रहे हैं.

ऑनलाइन की मान्यता पर सवाल
आधे से ज्यादा संख्या में पालकों ने न फीस भरी है, न पुस्तकें खरीदी हैं और न ही ऑनलाइन कक्षा शुरू की है. पढ़ाई को लेकर भी अलग-अलग स्कूलों के बीच बहुत विषमता है. जिन पालकों पर आर्थिक मार पड़ी है उनके बच्चे पढ़ाई से पूरी तरह दूर हैं. ऐसे में सरकार ऑनलाइन पढ़े और न पढ़े हुए विद्यार्थियों के बीच सरकार क्या फैसला लेगी, इस पर सवाल खड़ा हुआ है.

उल्लेखनीय है कि सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर पहले से अब तक कोई स्पष्ट नियम नहीं दिया था. यह सिर्फ ऐच्छिक आधार पर था. इसलिए बड़े निजी स्कूलों से जुड़े पालकों ने अपने बच्चों की कक्षाएं शुरू करा दीं. शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल से जुड़े पालक वर्धमान नगर निवासी अभिनव लाल और विक्रम राव ने बताया कि स्कूलों ने भी फीस को लेकर स्पष्ट नहीं बताया था, सिर्फ कक्षाओं से जुड़ने को कहा था. अब स्कूल तीन महीने की पूरी-पूरी फीस मांग रहा है. इससे पालक सकते में आ गए हैं.

बच्चों को सिर, गर्दन, पीठ में तकलीफ
भारतीय अभिभावक संघ के संयोजक इतवारी निवासी अभिषेक जैन ने बताया कि कक्षा पांचवीं से ऊपर के बच्चों की कक्षा तीन से पांच घंटे तक चल रही हैं जिसमें उन्हें लगातार बैठे रहना पड़ रहा है. पालकों की सभी ओर से शिकायतें आ रही हैं कि बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करने से बहुत सारी दिक्कतें सामने आ रही हैं. बच्चों को सिरदर्द, आंखों में जलन, पीठ, गर्दन और कमर में दर्द हो रहा है. कक्षा आठवीं और नौवीं तक के विद्यार्थी तो ठीक लेकिन कक्षा तीसरी से छठवीं-सातवीं तक के बच्चों को बहुत सारी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है. यास्मिन मेहता ने कहा कि जब इन ऑनलाइन कक्षाओं को सरकारी मान्यता नहीं है, जिससे अभिभावक भी परेशान हैं, ऐसी कक्षाओं से हमारे बच्चे मुक्त होना चाह रहे हैं.