Fadnavis strongly attacked, said - Thackeray government failed on every front in last 1 year

नागपुर. केन्द्र सरकार द्वारा किसान बिल पास किये जाने पर कांग्रेस व कुछ विरोधी दलों द्वारा विरोध किया जा रहा है इस पर करारा कटाक्ष करते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व विरोधी पक्ष नेता देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस का किसान विरोधी चेहरा उजागर हो गया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने खुद 2019 के लोस चुनाव और 2017 के पंजाब चुनाव में किसान हित के लिए इस किसान बिल को लागू करने का आश्वासन दिया लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसे लागू कर दिया तो वही उसका विरोध कर रही है. उन्होंने कहा कि इससे कांग्रेस का असली चेहरा बेनकाब हुआ है.

अगर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2019 के लिए अपनी ही पार्टी का घोषणा पत्र देखा होता, तो वे बिल का विरोध नहीं करते. महाराष्ट्र में तो 2006 में जब कांग्रेस-राकां की आघाड़ी सरकार थी तभी उक्त किसान बिल को लागू कर दिया गया है. जिसका लाभ भी  राज्य के किसानों को हो रहा है. कांटेक्ट खेती के चलते नाशिक में टमाटर और आलू सहित अन्य उपजों की वेल्यू चेन विकसित हुई है. देवेन्द्र प्रेस परिषद में बोल रहे थे. इस अवसर पर महापौर संदीप जोशी, विधायक कृष्णा खोपड़े, विकास कुंभारे, गिरीश व्यास, दयाशंकर तिवारी भी उपस्थित थे.

किसानों को पूरा हक
देवेन्द्र ने कहा कि किसान बिल से किसानों को पूरा हक दिया गया है कि वे अपनी उपज को किसे, कितनी कीमत में और देश में कहां बेचें. इस बिल से कृषि में निजी क्षेत्र की पूंजी आने से किसानों को लाभ होगा. उन्हें बाजार समितियों जो टैक्स देना पड़ता था उससे मुक्ति मिलेगी. आढ़तियों की मध्यस्थता समाप्त होगी. जिस कंपनी से किसान करार करेगा उस कंपनी को फसल में नुकसान होने पर भी उतनी रकम किसान को देनी ही होगी. और करार से अधिक का लाभ हुआ तो अतिरिक्त लाभ का हिस्सा भी किसान को देना होगा. खेत किसान की ही रहेगी वह कंपनी हथिया नहीं सकेगी. वहीं समर्थन मूल्य भी लागू ही रहेगी, यह पीएम ने स्पष्ट कर दिया है.

देवेन्द्र ने कहा कि नीति आयोग ने मुख्यमंत्रियों की एक टास्क फोर्स तैयार की थी जिसमें वे अध्यक्ष थे. कर्नाटक के सीएम और मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ भी उसमें थे. तब कमलनाथ ने तो किसानों के हित के लिए कई और भी सुझाव दिये थे लेकिन आज वही कांग्रेस उसका विरोध कर रही है. कांग्रेस सहित जो भी विपक्षी दल किसानों को गुमराह करने का कार्य कर रहे हैं भाजपा उसका तीव्र निषेध करती है. इसके पीछे कांग्रेस है जिसका चेहरा हम उजागर करेंगे. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह मुद्दा हमारे लिए राजनीतिक नहीं है. किसानों का शोषण रोकना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इस पर पिछले 10 वर्षों से सकारात्मक चर्चा हुई है लेकिन, फिलहाल इसका विरोध सिर्फ विरोध के लिए किया जा रहा है.

शिवसेना कनफ्यूज्ड पार्टी
किसान बिल के संदर्भ में शिवसेना के रुख से संबंधी सवाल पर देवेन्द्र ने कहा कि शिवसेना पूरी तरह कनफ्यूज्ड पार्टी है. वह हर मामले में कभी समर्थन करती है फिर विरोध करती है. कभी लोकसभा में समर्थन करती है फिर राज्यसभा में उसी का विरोध करती है. उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा के साथ जब शिवसेना की पिछली सरकार थी तो वह सरकार में रहते हुए भी विरोधी पक्ष की भूमिका निभाती थी. उन्होंने कहा कि शायद वह जिनके साथ सत्ता में हैं उन्हें यह दिखाना चाहती है कि वह उनके साथ है और दूसरी पार्टीयों का साथ पाने के लिए विरोध की भूमिका में भी नजर आती है. उन्हें पहले अपनी भूमिका तय करना सीखना होगा. शिवसेना ने कभी भी कृषि पर कोई स्टैंड नहीं लिया.

पुलिस का अपमान कभी नहीं हुआ
राज्य में नेताओं की टेलिफोन टैपिंग व पुलिस अधिकारियों पर गृहमंत्री अनिल देशमुख के हालिया वक्तव्यों से संबंधी सवालों पर देवेन्द्र ने कहा कि राज्य के इतिहास में किसी भी गृहमंत्री ने कभी अपनी पुलिस पर इतना अविश्वास नहीं दिखाया. अपनी ही पुलिस बल का अपमान करना उचित नहीं है. टेलीफोन टैपिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नियम बनाए हैं. कोई भी राजनेता इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता. उनके पास मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव के स्तर पर शक्तियां हैं. अगर अनिल देशमुख ने इस तरह के अधिकार लिए हैं, तो यह गलत हैं.