Bawankule
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  • दलालों की दूकान बंद होने का भय

नागपुर. भाजपा के प्रदेश महामंत्री व पूर्व उर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा ही नहीं बचा है और इसलिए वह अब किसानों के हितों के कानून का भी विरोध कर आंदोलन को भड़काने का काम कर रही है. वे प्रेस परिषद में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि देश का 90 प्रतिशत किसान केन्द्र सरकार द्वारा पारित 3 नये कानून के साथ हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि यह उनकी उन्नति व भलाई के लिए है. केवल पंजाब और हरियाणा के दलाल किसानों को भड़काकर यह आंदोलन कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने जो कानून बनाया है उसमें स्वामीनाथन आयोग की कई सिफारिशों को भी शामिल किया गया है. केवल किसानों को गुमराह किया जा रहा है. इस आंदोलन के पीछे कांग्रेस और अन्य विरोधी पार्टियों का हाथ है. प्रेस परिषद में धर्मपाल मेश्राम, राजीव पोतदार, अशोक धोटे, रमेश मानकर, संध्या गोतमारे, आनंदराव राऊत, चंदन गोस्वामी उपस्थित थे. बावनकुले ने कहा किसानों को उपज का दोगुना दाम दिलाना केन्द्र का लक्ष्य है जिसके लिए तीन कृषि कानून बनाए गए. इस कानून में के चलते किसानों को उनकी मर्जी का भाव मिलेगा. देश में किसी भी बाजार में वे अपनी उपज बेच के लिए स्वतंत्र हैं.

दलाली में बने करोड़पति

बावनकुले ने आरोप लगाया कि पंजाब व हरियाणा में किसानों की उपजों की खरीदी-बिक्री करने वाले हजारों दलाल करोड़पति, अरबपति बन गए हैं. नये कानून से उनकी दूकानदारी बंद हो जाएगी. इन दलालों में राजनीतिक पार्टियों से जुड़े नेता भी है. इसलिए किसानों की आड़ में और उन्हें गुमराह कर आंदोलन को भड़काया जा रहा है. इसमें कांग्रेस का भी हाथ है. कांग्रेस के पास दूसरा कोई मुद्दा ही नहीं है. चुनाव में लगातार असफल हो रही कांग्रेस किसानों को गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रही है. 

महाराष्ट्र में पहले ही लागू

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र राज्य में यहां की तात्कालीन कांग्रेस सरकार ने ही इस तरह का कानून पहले ही लागू किया है. कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र में महाराष्ट्र सरकार द्वारा लागू किये गए कानून को ही केन्द्र सरकार ने लागू किया ऐसा उल्लेख किया गया. 2010 में तात्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने देश के सभी मुख्यमंत्रियों को पक्ष लिखकर किसानों की उपज को देश के किसी भी बाजार में बेचा जा सके ऐसा निर्णय लेने का आग्रह किया था. जो कांग्रेस नहीं कर सकी उसे नरेन्द्र मोदी सरकार कर दिया तो अब पेट में दर्द हो रहा है.

कांग्रेस किसानों को बरगला कर व असंतोष पैदा कर सत्ता में आने का सपना देख रही है. सरकार ने किसानों की 6 बैठकों में 6 मांगें मान ली है. लेकिन पंडाल में लौटकर और नई मांग आगे करते हैं. नया कानून रद्द करना संभव नहीं है, उसमें संशोधन किया जा सकता है. ठेकेदारी सिस्टम से खेती में छोटे किसानों के फायदा है. अल्पभूधारक किसानों को अत्याधुनिक यंत्र उपयोग करना संभव नहीं है. 

300 यूनिट तक बिजली बिल माफ करो

बावनकुले ने कोरोना काल के चलते आर्थिक संकट में आए गरीब व मध्यमवर्ग परिवारों के 300 यूनिट तक बिजली बिल माफ करने की मांग की. उन्होंने कहा कि मंत्री के बंगले पर 90 करोड़ रुपये मरम्मत व नवीनीकरण में खर्च किया जा रहा है और बिजली बिल माफी नहीं दी जा रही. बिजली बिल माफी के लिए सरकार महावितरण को 10 हजार करोड़ रुपये दे. मुंबई सहित राज्य भर में शून्य से 100 और शून्य से 300 यूनिट तक प्रतिमाह बिजली उपयोग करने वाले गरीब ग्राहकों का बिल माफ किया जाना चाहिए. ये बिल लॉकडाउन के दौरान के होंगे जब परिवारों की आय तक बंद हो गई थी.