30 lakh grant on death from corona, energetic minister announces monthly delivery for employees

  • ऊर्जामंत्री से विविध पार्टी, संगठनों की मांग

नागपुर. कोरोना संक्रमण लाकडाउन के 3 महीनों के बिजली बिल को रद्द करने और माफ करने की मांग अब विविध पार्टी व संगठनों द्वारा की जा रही है. कांग्रेस सरकार में ही मंत्री रहे अनीस अहमद ने भी ऊर्जामंत्री नितिन राऊत से भेंट कर बिजली बिल माफ करने की मांग की. उन्होंने कहा कि संकटकाल में लोगों के रोजगार व कमाई के स्रोत बंद हो गए. लोगों के वेतन में भारी कटौती की गई. मजदूरों, कामगारों, निजी संस्थानों में नौकरीपेशा लोगों का काम छिन गया ऐसे में ती महीने का बिजली आघात के रूप में उनके सामने आया है.

उन्होंने आरोप लगाया कि मर्क ने 1 अप्रैल से बिजली दरों में वृद्धि की है जबकि महामारी के परिणाओं को देखते हुए बिजली बिल कम किया जाना चाहिए. उन्होंने केरल, दिल्ली, मध्यप्रदेश सरकारों द्वारा लोगों को बिल में दी गई राहत की तर्ज पर कुछ इकाइयों को बिजली बिल माफ करने की मांग की. साथ ही कहा है कि जो बिल नहीं भर सकते उनके बिजली कनेक्शन नहीं काटे जाएं.

राहत के साथ 10 किश्त की सुविधा
वंचित बहुजन आघाड़ी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर मांग की है कि मजदूरों, बीपीएल कार्डधारकों, रिक्शा चालकों, सेलून, दूकानों के नौकरों, पेंटर व अन्य मजदूर वर्ग का कोरोनाकाल का बिजली बिल पूरी तरह माफ किया जाए. जो नौकरीपेशा वर्ग हैं और जिन्हें आधा वेतन मिला है. ऐसे सभी कर्मचारियो के बिल में 300 यूनिट तक की रकम माफ की जाए और शेष रकम को 10 समान किश्तों में जमा करने की सहुलियत दी जाए. 

1.50 रुपये युनिट महंगी हुई बिजली
भाकपा नेता अरुण वनकर ने भी शिष्टमंडल के साथ ऊर्जामंत्री राऊत से मुलाकात की और कहा कि महावितरण से साहूकारी तरीके से बिल भेजा है. मार्च से मई महीने के बिल एक ही स्लैब रेट से भेजा गया है. उन्होंने कहा कि नियामक आयोग ने अप्रेल महीने से बिजली बिल का रेट 1.25 से 1.50 रुपये युनिट तक बढ़ा दिया है जिसके चलते बिल में भारी बढ़ोतरी हो गई है. कोरोना लाकडाउन के कारण लोगों के पास पैसे नहीं हैं. उन्होंने मांग की कि रेट वृद्धि वापस ली जाए. जनता को 100 युनिट की छूट दी जाए. बिल को किश्तों में जमा करने की सुविधा दी जाए. उनके साथ अनिल सहारे, ज्ञानदास गजभिये, संजय राउत, दिलीप तायडे, रवि पराते उपस्थित थे. 

हर महीने का अलग बिल दें
एसिक कालोनी समिति के सचिव सचिन पवार ने नागरिकों की ओर से मांग की है कि मार्च से मई तक बिल हर महीने के अलग-अलग दिए जाएं. हर ग्राहक को तीन बिल दिए जाएं. कई ग्राहकों के बिलों से लाकडाउन के दौरान जमा की गई औसत बिल की राशि को घटाया नहीं गया है. जिन ग्राहकों के घर की हर महीने की खपत 80 यूनिट तक रहता है उनके भी हजारों रुपये के बिल आए हैं. बिल का रेट बढ़ा दिया गया, शुल्क बढ़ा दिया गया जिसे रद्द किया जाना चाहिए.

10 हजार करोड़ पर केन्द्र का ब्याज
भाकपा के सहसचिव अरुण वनकर ने बताया कि ऊर्जामंत्री से भेंट के दौरान उन्होंने जानकारी दी कि केन्द्र सरकार से 10 हजार करोड़ रुपये की मांग की है. लेकिन केन्द्र से वह 10.5 फीसदी ब्याज पर उपलब्ध कराने की बात कह रही है. केन्द्र को कम ब्याज दर में अनुदान देना चाहिए तभी जनता को सहुलियत देना संभव हो पाएगा. आज की स्थिति में राज्य सरकार की आर्थिक हालत खस्ता है और अपने दम पर राज्य सरकार सहुलियत नहीं दे सकती. ग्राहकों को तीन किश्तों में बिल जमा करने की सुविधा दी जा सकती है. 

सीधे मुंह बात नहीं कर रहे बिजली कर्मी
इधर, काफी शिकायतें यह भी मिल रही हैं कि महावितरण के कार्यालयों में अपने बिजली बिल के बारे में जानकारी लेने जाने वालों से कर्मी सीधेमुंह बात नहीं कर रहे हैं. एक ग्राहक ने बताया कि वे अपने बिजली बिल के संदर्भ में समझने गए थे तो कर्मचारी ने बिल देखे बगैर ही कह दिया कि- यह तो आपको जमा करना ही होगा. केवल इसे 3 किश्तों में हम कर सकते हैं. कार्यालयों में भारी भीड़ उमड़ रही है और कोरोना काल में यह खतरनाक हो सकता है.