Nagpur District Court

  • कोरोना के चलते वकीलों पर आई मुसिबत

नागपुर. कोरोना वायरस का असर हर तपके पर पड़ा है. हर पेशे के लोग इससे प्रभावित हुए है. अब हालात सुधर रहे है. यही कारण है कि सरकार ने अनलॉक की प्रक्रिया शुरु कर दी है. मॉल, सिनेमा घर, होटल और बार सबकुछ शुरु हो गया है. जनता की गाड़ी तो पटरी पर आती दिख रही है, लेकिन वकीलों पर मुसिबतों का साया अब भी मंडरा रहा है. 7 महीने से वकील घर पर बैठे है. कोर्ट का काम अब भी नियमित रूप से शुरु नहीं हुआ है. इस वजह से मामलों पर सुनवाई नहीं हो रही है. अच्छे-अच्छे लॉयर की वकालत ठप पड़ी है. कोर्ट में केवल जरूरी मामलों की ही सुनवाई हो रही है. ऐसे में वकील परेशान है और अब मुख्य न्यायाधीश से नियमित रूप से कोर्ट शुरु करने की मांग की जा रही है.

वकीलों की परेशानी समझना जरूरी 

महामारी के समय सतर्कता के लिहाज से लगाई गई पाबंदी बिलकुल सही थी, लेकिन अब सब सामान्य हो रहा है. दूकानें, मॉल और मल्टीप्लेक्स शुरु हो गए है. वकीलों की परेशानी भी समझना जरूरी है. आम वकीलों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो रही है. मुवक्किल परेशान है. वीडियो कान्फ्रेंसिंग से सिर्फ चंद वकीलो का काम चल रहा है. अर्जंट मुकदमों की सुनवाई कोर्ट में शुरु होनी चाहिए. हर वकील के पास वीडियो कान्फ्रेंसिंग की सुविधा नहीं है. प्रदेशों में चुनाव की घोषणा हो चुकी है. लाखों लोग वोट देंगे. उम्मीदवार अपने प्रचार के लिए रैली करेंगे. परीक्षाएं आयोजित की जा रही है. सामाजिक कार्यक्रमों को भी अनुमति दी जा रही है. ऐसे में केवल कोर्ट शुरु होने से कोरोना का खतरा नहीं बढ़ेगा. लोगों को न्याय दिलाने का काम करने वाले वकीलों के साथ न्याय कब होगा. न्यायाधीशों के जाने-आने का रास्ता अलग होता है. वकील और उनके मुवक्किलों से दूरी रहती है. बावजूद इसके न्यायाधीशों को खतरा लग रहा है. ऐसा ही चलता रहा तो वकील भूखे मर जाएंगे.  -अधि. प्रकाश जायसवाल.

अब बढ़ रहा है रोष 

मार्च महीने से समस्त न्यायालय बंद बै. अनलॉक शुरु होने के बाद अमुमन सारी गतिविधियों शुरु हो चुकी है, लेकिन कोर्ट नियमित रूप से कब शुरु होंगे. वस्तुस्थिति यह है कि ज्यादातर वकीलों के लिए कुछ दिन कोर्ट बंद रहना भी भीषण आर्थिक मुश्किलों का कारण है. वकील कोई सैलरी नहीं पा रहे हैं. 

कोर्ट बन्द रखकर समस्त वकील वर्ग का आजीविका का एकमात्र साधन उनसे छीन लिया गया है. अब वकीलों में रोष बढ़ता जा रहा है. संकट की इस घड़ी में डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने अपने वकीलों की सामर्थ्य से ज्यादा मदद की है. लेकिन एसोसिएशन की मदद कर सकने की एक मर्यादा है. यह सर्वविदित है कि जिन्हें लॉक डाउन के कारण आंशिक नुकसान हुआ है उन्हें कई तरह के पैकेज और सहूलियतें सरकार ने दी हैं. यह कहने की आवश्यकता नहीं कि वकीलों ने स्वयं का व्यवसाय करने का निर्णय लेकर सरकार को उन्हें नौकरी देने की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया है. फिर औरों के हक की लड़ाई लड़नेवाले वकीलों की ओर सरकार का ध्यान क्यों नहीं है. या तो कोर्ट खोले जाएं या वकीलों की आजीविका का प्रबंध सरकार करें. इतने समय तक बेवजह कोर्ट के कामकाज बन्द करके प्रलंबित मामलों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार जिम्मेदार है. व्यवस्था के साथ निश्चित रूप से न्यायालयों में सुरक्षित काम हो सकता है. – डीबीए अध्यक्ष कमल सतुजा. 

केवल चंद वकीलों को मिल रहा फायदा

सरकार और मुख्य न्यायाधीश को अब वकीलों की हालत के बारे में सोचना चाहिए. अधिकांश वकीलों की आर्थिक हालत खस्ता हो गई है. कोर्ट में कई वकील ऐसे है जो रोज कमाकर अपना घर चलाते है. सबकी प्रैक्टिस एक जैसी नहीं होती. वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए केवल चंद वकीलों को फायदा मिल रहा है. हर वकील के पास यह सुविधा नहीं है. आम वकीलों के बारे में सोचना जरूरी है. बड़े दुख की बात है कि कोर्ट बंद होने के कारण कुछ वकील मजदूरी तक कर रहे है. वकालत छोड़कर उन्हें दूसरे काम करने पड़ रहे है. यह हमारे पेशे को शोभा नहीं देता, लेकिन मजबूरी में उन्हें ये काम करने पड़ रहे है. वकील प्रोफेश्नल टैक्स देते है. आयकर भरते है. उनकी समस्या पर ध्यान देना सरकार की जिम्मेदारी है. सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा तो न्याय व्यवस्था भी चलनी चाहिए. केवल न्यायाधीशों को ही कोरोना का डर है. – अधि. सुदीप जायसवाल.

सावधानी के साथ शुरु हो काम

कोरोना का खतरा केवल न्यायाधीशों को नहीं है. इसका संक्रमण तो किसी भी तरह हो सकता है. कोर्ट में काम करने वाले कर्मचारी भी बाधित हो सकते है. केवल वकीलों से ही परहेज क्यूं. सावधानी के साथ कोर्ट का काम नियमित रूप से शुरु किया जा सकता है. मास्क, सैनिटाइजर और एक वक्त पर एक केस की सुनवाई करके भी काम किया जा सकता है, लेकिन वकीलों की समस्या पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है. कई वकील भाई ऐसे है जो रोज कमाकर अपना घर चलाते है. लॉकडाउन के समय सारी जमा पूंजी खतम हो गई. नियमित काम शुरु होते ही कोर्ट में भीड़ नहीं लग जाएगी. सभी को कोरोना वायरस का डर है. वकील भी इस महामारी को लेकर सतर्क है. अब समय आ गया है कि जल्द से जल्द कोर्ट शुरु किए जाए. वरना कई वकीलों पर भूखे मरने की नौबत आ जाएगी.