Black Fungus Updates: Dangerous cases of black fungus in Mumbai, 3 children had to have their eyes removed
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    नागपुर. एक ओर जहां कोरोना के मरीज कम हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ रहे हैं. कोरोना से पीड़ितों को रिकवर होने के बाद भी मधुमेह सहित विविध बीमारियों से ग्रसित लोगों में ब्लैक फंगस का प्रमाण बढ़ने लगे हैं. इस बीमारी से कई लोगों की आंखें भी खराब हो रही हैं. इनदिनों ब्लैक फंगस के मरीजों को दी जाने वाली दवाइयों की कमी गंभीर समस्या बनी हुई हैं. समय पर दवाई नहीं मिलने के कारण भी कई मरीजों की जान जा रही है.

    ब्लैक फंगस के मरीजों को लिपोसोमल अम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन दिया जाता है. किसी भी मरीज को एक से 40 इंजेक्शन दिये जाते हैं. एक दिन में 3-4 इंजेक्शन लगाये जाते हैं. लेकिन इंजेक्शन की कमी बनी हुई है. खुले बाजार में इंजेक्शन नहीं मिल पाता है. यह इंजेक्शन जिला शल्यचिकित्सक के माध्यम से आंवटित किये जाते हैं. शनिवार तक एम्स में ब्लैक फंगस के 18 मरीज भर्ती थे. इसमें से केवल 3 मरीजों को ही इंजेक्शन मिल पाये. जबकि अन्य मरीजों को वेटिंग पर रखा गया है. मेडिकल और मेयो में तो इससे भी अधिक भर्ती है. जबकि सिटी के प्राइवेट अस्पतालों में अनेक मरीजों का इलाज चल रहा है. इंजेक्शन नहीं मिलने के कारण कई मरीजों की मौत भी हो रही हैं. 

    डॉक्टर भी असहाय 

    बताया जाता है कि इंजेक्शन का उत्पादन कम होने की वजह से आपूर्ति नहीं हो रही है. जबकि विदर्भ में ब्लैक फंगस के मरीज अधिक मिल रहे हैं. इस हालत में विदर्भ को सबसे ज्यादा आपूर्ति की जानी चाहिए. लेकिन स्थिति विपरीत बनी हुई है. एक अस्पताल को जरूरत का आधे भी इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं. इससे मरीजों का डोज पूरा नहीं हो रहा है. यही वजह है कि तबीयत में जल्द सुधार नहीं हो रहा है. जिन मरीजों में पहले से विविध तरह की बीमारी हैं उनके शरीर के अवयव खराब हो रहे हैं. कई मरीज अब तक अपनी आंखें गंवा चुके हैं. वहीं कई मरीज ब्रेन इंफेक्शन का शिकार हो चुके है. प्राइवेट अस्पतालों में रकम खर्च करने के बाद भी मरीज ठगा सा महसूस कर रहा है. जबकि सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन लेने वाले मरीजों की प्रतीक्षा सूची बढ़ती जा रही है. इंजेक्शन के अभाव में डॉक्टर भी असहाय महसूस कर रहे हैं. परिजन इंजेक्शन के लिए भटक रहे हैं. डॉक्टरों के सामने गिड़गड़ाने के बाद भी कोई लाभ नहीं मिल रहा है. 

    गंभीरता से लें प्रशासन: प्रमोद 

    कांग्रेस पदाधिकारी प्रमोद ठाकुर ने बताया कि इंजेक्शन की कमी की वजह से लोगों की जान जाना गंभीर मुद्दा है. इस संबंध में प्रशासन को योग्य नियोजन करना चाहिए. परिजनों को अब भी भटकना पड़ रहा है. लोगों ने करोना काल में भी मुसीबतों का सामना किया, लेकिन ठीक होने के बाद भी मुसीबतें झेल रहे हैं. जितने मरीज उतने इंजेक्शन हर दिन मिलते रहने से बीमारी से जल्दी निपटने में मदद मिलेगी. लेकिन सिटी में स्थिति विपरीत बनी हुई है. सरकारी और प्राइवेट दोनों जगह ही इंजेक्शन की कमी बनी हुई है. कोरोना की तीसरी लहर की पहले ही संभावना व्यक्त की गई है. इस हालत में प्रशासन को चाहिए कि ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाये. 

    अब तक 113 की मौत

    ब्लैक फंगस से अब तक जिले में 113 लोगों की मौतें हो चुकी हैं जो पूर्व विदर्भ के 6 जिलों में सबसे अधिक है. संभाग के 5 जिलों में सिर्फ 9 मौतें हुई हैं. इसके साथ ही जिले में अब तक 1,245 मरीज मिले हैं. इनमें से 915 की सर्जरी हो चुकी है और 599 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं. विभाग में अब तक कुल 1,479 मरीज मिले हैं. भंडारा जिले में अब तक 14 मरीज मिले जिसमें से 4 की सर्जरी की गई.वहीं चंद्रपुर जिले में 86 मरीज मिले इनमें से 44 की सर्जरी हो चुकी है और 33 डिस्चार्ज हुये. साथ ही 2 की मौत हुई है. गड़चिरोली में अब तक कोई भी मरीज नहीं मिला. गोंदिया में 41 मरीज मिले जिनमें से 18 की सर्जरी हुई और 5 डिस्चार्ज किए गए. साथ ही 4 की मौत हो चुकी है. इसी तरह वर्धा में 93 मरीज मिल चुके हैं जिनमें से 50 मरीजों की सर्जरी हुई, 26 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है. साथ ही 3 लोगों की मौत हो चुकी है.

    – 1,245 कुल मरीज 

    – 915 की सर्जरी 

    – 599 हुये डिस्चार्ज