Mayo Hospital

  • अब प्रशासनिक लापरवाही बढ़ा रही महामारी

नागपुर. प्रशासन भी मान चुका है कि कोरोना के मरीजों के मौत की एक वजह देरी से अस्पताल में भर्ती होना है. लेकिन बीमार होने के बाद भी मरीज घर पर ही क्यों रह रहे हैं. क्या मरीजों में डर समा गया है या फिर सरकारी अस्पतालों में इलाज को लेकर संदेह पैदा हो रहा है. इस तरह के तमाम सवालों के बाद भी प्रशासन द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है. गुरुवार को मेयो में भर्ती ऐसे 7 मरीजों की मौत हो गई जिन्हें मंगलवार और बुधवार को भर्ती कराया गया था. यानी केवल 1-2 दिन के भीतर ही मरीजों की मौत हो गई.

पिछले 15 दिनों में मेडिकल और मेयो में भर्ती अधिकांश मरीजों की मौत पाजिटिव रिपोर्ट आने के 4-5 दिन के भीतर हुई है. लेकिन डाक्टरों का साफ कहना है कि मृतक इससे पहले ही संक्रमित हुये हैं. हो सकता है कि उन्होंने समय पर जांच नहीं कराई होगी या फिर लक्षण दिखने के बाद भी घर पर रहकर ही दवाई खाते रहे. यह स्थिति सिटी के लिए भयंकर हो गई है. कोई भी मरीज पाजिटिव आने के बाद उसके संपर्क में आने वालों की सूची तैयार की जाती है. उन्हें संस्थागत या फिर होम क्वारंटाइन किया जाता है. इतना होने के बाद भी मरीज गंभीर अवस्था में ही मेयो और मेडिकल में भर्ती क्यों हो रहे हैं.

सवाल होने लगे खड़े
मेयो में गुरुवार को जिन मरीजों की मौत हुई उनमें 43 वर्षीय लालगंज निवासी पुरुष को मंगलवार को भर्ती किया गया था. इसी तरह 62 वर्षीय हिवरीनगर निवासी को बुधवार को, सदर आजाद चौक निवासी 65 वर्षीय को बुधवार, 57 वर्षीय निवोबाभावे नगर निवासी को बुधवार, 73 वर्षीय महल निवासी को बुधवार और 70 वर्षीय गांजाखेत निवासी को मंगलवार को भर्ती कराया गया था. इन सभी मरीजों को परिजनों ने गंभीर अवस्था में भर्ती कराया था. सवाल यह उठता है कि परिजनों ने गंभीर अवस्था होने से पहले जांच नहीं कराई थी क्या. या फिर जांच में पाजिटिव आने के बाद इलाज नहीं कराया था. इस तरह के तमाम सवाल अब सामने आने लगे हैं. 

अब तक 108671 की जांच
इस बीच गुरुवार को 18 मरीजों की मौत हो गई. इनमें एक ग्रामीण, एक जिले से बाहर और 16 मरीज सिटी के थे. अब तक कुल मरीजों की संख्या 420 हो गई है. वहीं 727 नये पाजिटिव मरीजों के साथ ही अब तक कुल संख्या 11709 हो गई है. अब तक जिले में 108671 लोगों की जांच कराई जा चुकी है. वहीं गुरुवार को 186 मरीजों को ठीक होने के बाद छुट्टी दी गई. अब तक 5516 मरीज ठीक होकर घर जा चुके है. मरीजों के मरने और बढ़ने के बाद जिले में रिकवरी रेट घटकर 47.11 फीसदी हो गया है. डाक्टरों की माने तो अगस्त का महीना कोरोना के फैलावा के महत्वपूर्ण होगा. 

निजी लैब के पाजिटिव का रिकार्ड ही नहीं
गुरुवार को सिटी की निजी लैब से 106 पाजिटिव मरीज मिले. वहीं रैपिड टेस्ट के माध्यम से 301 मरीजों की रिपोर्ट आई. जबकि मेयो की लैब से 103 मरीज आये. बताया जाता है कि निजी लैब से पाजिटिव आने वाले सभी मरीजों का रिकार्ड उपलब्ध नहीं है. पाजिटिव रिपोर्ट आने के बाद भी मरीज कहां भर्ती है. कहां घुम रहा है, इसका रिकार्ड मनपा के पास भी नहीं है. यही वजह है कि कोरोना महामारी तेजी से लोगों को अपने चपेट में ले रही है. 

वीएनआईटी कोविड सेंटर के 13 डाक्टर, नर्स पाजिटिव
अब तक मेडिकल और मेयो के डाक्टर और नर्स पाजिटिव आये थे. लेकिन अब कोविड सेंटर के डाक्टर और नर्स भी पाजिटिव आने लगे हैं. बुधवार को वीएनआईटी कोविड सेंटर में कार्यरत स्टाफ की जांच की गई. इसमें 8 डाक्टर, 3 नर्स और 1 डाटा एंट्री आपरेटर सहित कुल 14 स्टाफ के पाजिटिव होने की जानकारी मिली है. रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद सभी को लता मंगेशकर अस्पताल में भर्ती किया गया है. साथ ही नया स्टाफ रख दिया गया है. बताया जाता है कि पाजिटिव आने वाले अधिकांश डाक्टर और नर्स शासकीय आयुर्वेद कालेज के है. 

सिटी में आज तक की स्थिति 

11709 कुल संक्रमित 

420 की मौत 

727 गुरुवार को पाजिटिव 

5516 हुये ठीक