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    नागपुर. अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश वी. डी. इंगले ने मेडिट्रिना अस्पताल के संचालक डॉक्टर समीर पालतेवार की अग्रीम जमानत याचिका को खारिज कर दिया. ज्ञात हो कि अस्पताल के पार्टनर गणेश चक्करवार की शिकायत पर पालतेवार के खिलाफ सीताबर्डी थाने में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था.

    चक्करवार ने आरोप लगाया था कि पालतेवार ने अस्पताल में उपयोग किए जाने वाले मेडनेट सॉफ्टवेयर में हेराफेरी करके रकम का गबन किया. गरीब मरीजों से मोटी रकम ली और उन्हें बिल भी दिए. लेकिन अस्पताल के सॉफ्टवेयर में रकम कम बताई गई. अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके पालतेवार ने करोड़ों रुपयों का गबन किया है. चक्करवार ने आरोप लगाया है कि कोविड काल में भी पालतेवार ने गरीब मरीजों से ज्यादा बिल वसूला. 22 फरवरी को इस प्रकरण में पालतेवार को अंतरिम राहत दी गई थी.

    बचावपक्ष के अधिवक्ता अविनाश गुप्ता और आकाश गुप्ता ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की. उन्होंने बताया कि पालतेवार को झूठे मामले में फंसाया जा रहा है. वे एक जाने-माने न्यूरोसर्जन है. शिकायतकर्ता चक्करवार से उनका पुराना विवाद है. दोनों के बीच दिवानी मामला चल रहा है. इसके पहले भी उन्हें फंसाने का प्रयास किया जा चुका है. पुलिस पहले ही उनसे पूछताछ कर बयान दर्ज कर चुकी है. सारी जानकारी भी उपलब्ध करवाई गई है. बिल, सॉफ्टवेयर और हार्ड डिस्क भी जब्त की जा चुकी है. इसीलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए.

    सरकारी पक्ष ने किया विरोध

    सरकारी वकील वसंत नरसापुरकर ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पालतेवार लंबे समय से रैकेट चला रहा है. जांच प्राथमिक स्तर पर है. कई मरीज शिकायत देने आगे आ रहे हैं. जमानत मिलने से जांच को प्रभावित किया जा सकता है. शिकायतकर्ता चक्करवार की ओर से अधिवक्ता श्याम देवानी और हर्षल भालेकर ने अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर के जरिए 3 बिलों में हेराफेरी की गई है. उन्होंने अंतरिम जमानत का उल्लंघन करते हुए गवाह को धमकी भी दी थी. इसकी शिकायत सीताबर्डी थाने में दर्ज है. जमानत मिलने पर जांच प्रभावित हो सकती है. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज कर दी.