Zilla Parishad member's name missing from voter list
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नागपुर. नाम के साथ ही यदि सरनेम में भी गड़बड़ी हो तो फिर अपनी पहचान बताने में दिक्कतें हो जाती हैं. इसी तरह की स्थिति मंगलवार को स्नातक निर्वाचन चुनाव में देखने को मिली. कुछ मतदाताओं के नाम में स्पेलिंग मिस्टेक देखी गई तो किसी का सरनेम ही बदल गया. जबकि कुछ मतदाताओं को उनके निवास के पते से 10-12 किमी दूर मतदान केंद्र मिला.

इस बार नये सिरे से मतदाता सूची तैयार की गई थी. इस वजह से कई नये मतदाता भी जुड़े. मतदाता बनने के लिए विविध तरह के दस्तावेज अनिवार्य किये गये थे. इनमें 10वीं, 12वीं, स्नातक की अंक सूची, डिग्री, आधार कार्ड, बिजली बिल आदि का समावेश था. इतना होने के बाद भी मतदाता सूची तैयार करने वाले कर्मचारियों से गलती हो गई.

नाम में गड़बड़ी होने से सरनेम ठीक होने पर दिक्कत नहीं आती. लेकिन कुछ मतदाताओं के नाम सहित सरनेम में गलती होने से मतदान केंद्र के कर्मचारी भी परेशान हो गये. पहचान पत्र दिखाने पर उसमें नाम सही और मतदाता सूची में नाम अलग होने से मिलान करने में दिक्कतें आईं. इस वजह से कुछ मतदाताओं को तो एक-दो पहचान पत्र दिखाना पड़ा. जिनके पास एक ही पहचान पत्र था उन्हें अपने घरों से मंगवाना पड़ा. 

बैलेट पेपर का पहला अनुभव

स्नातक निर्वाचन चुनाव में मतदाता कम होते हैं. यही वजह है कि केंद्र अधिक नहीं होते. इस हालत में मतदाताओं को ज्यादा दूरी के मतदान केंद्र नहीं मिलते. लेकिन इस बार कुछ मतदाताओं को तो 10-12 किमी दूरी पर बने मतदाता केंद्र मिले. कई परिवार में पत्नी और पति दोनों को ही अलग-अलग केंद्रों पर मतदान करना पड़ा. 

हालांकि अपने मताधिकार का प्रयोग करना था, इसलिए मतदाता करने गये भी. युवाओं के साथ ही 70 वर्ष के बुजुर्ग तक ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट किया. लेकिन कुछ ने आनाकानी भी की. बैलेट पेपर पर मतदाताओं के नाम सहित चित्र भी दिये जाने से मतदाताओं को पहचान करने में आसानी हुई. अब विधानसभा और लोकसभा में ईवीएम मशीन से वोटिंग होती है. इस वजह से पहली बार मतदान करने वालों के लिए बैलेट पेपर का अनुभव भी नया ही था.