Nurses Strike
File Photo : PTI

  • मेडिकल, मेयो और सुपर में ऑपरेशन ठप
  • 86 नर्सें ही मेडिकल में कर रहीं कार्य 
  • 34 वार्ड ही कार्यरत 
  • 750 नर्सें मेडिकल की हड़ताल पर 
  • 220 नर्सें मेयो की शामिल 

नागपुर. पहले 2 घंटे आंदोलन, फिर 2 दिन की हड़ताल के बाद भी प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने के बाद पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत नर्सों के संगठन ने 25 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय ले लिया है. कोरोना महामारी के काल में नर्सों की हड़ताल ने मेडिकल, मेयो और सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल प्रशासन का टेंशन बढ़ा दिया है. फिलहाल सभी पूर्व नियोजित ऑपरेशन पर रोक लगा दी गई है. इतना ही नहीं वार्डों की संख्या भी कम कर दी गई है. 

2 दिनों तक जारी नर्सों के काम बंद आंदोलन की वजह से मेयो, मेडिकल और सुपर में स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई है. मेडिकल के अधिष्ठाता ने नियोजित शल्यक्रिया नहीं करने के संबंध में पत्र जारी किया है. केवल आकस्मिक शल्यक्रिया करने के ही आदेश दिए गए हैं. मेडिकल में 1,700 बेड हैं और 50 वार्ड कार्यरत हैं. केवल 86 नर्सों के भरोसे 2 दिनों तक व्यवस्था चलाई गई लेकिन अब अनिश्चितकालीन हड़ताल की वजह से वार्डों की संख्या कम करते हुए 34 कर दी गई है. मरीजों को वार्डों में शिफ्ट किया जा रहा है. मेडिकल की 750, मेयो की 220 और सुपर की 70 से अधिक नर्सें हड़ताल में शामिल हुई हैं. मेडिकल में संयोगिता म्हैसगवली-कांबले, सायमन माडेवार, रंजना लोखंडे, भारती नेटके तथा मेयो में अंकुश खोरगडे, एकता रंगारी, यशक्षी बोदिले, समीक्षा समुंद्रे, नीलिमा जाधव आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं. 

मरीजों की दिक्कतें बढ़ीं 

नर्सों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से प्रशासन द्वारा निजी नर्सिंग कॉलेज, नर्सिंग स्कूलों से संपर्क कर मदद मांगी जा रही है. नर्सों का कहना है कि आंदोलन के बारे में सरकार को पहले ही अवगत कराया गया था. इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया गया. 2 दिनों तक 2 घंटे काम बंद किया गया. इसके बाद 2 दिन पूरा काम बंद किया गया. यानी 4 दिनों तक आंदोलन जारी रहने के बाद भी प्रशासन ने मामले में गंभीरता नहीं दिखाई. यही वजह रही कि नर्सों के सामने हड़ताल के अलावा अन्य पर्याय नहीं रह गया. महामारी के इस काल में  यह हड़ताल लंबी चली तो मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाएगी.