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  • परिवहन मंत्री परब से मांग, सौंपा ज्ञापन

नागपुर. कोरोना महामारी के कारण जारी लाकडाउन ने आटोचालकों की कमर तोड़ दी है. आर्थिक स्थिति बद से बदतर होने के चलते अब विदर्भ में आटोचालकों ने आत्महत्या का रास्ता अपना लिया है. ऐसे में उनके परिवार रास्ते पर आ गये है. ऐसे में सरकार ने हर आत्महत्याग्रस्त आटोचालक के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए. विदर्भ आटोरिक्शा चालक फेडरेशन के अध्यक्ष विलास भालेकर द्वारा परिवहन मंत्री अनिल परब को इस मांग के साथ ज्ञापन सौंपा गया. इस दौरान आटोचालकों की अन्य समस्याओं पर भी चर्चा की गई.

भालेकर ने कहा कि लाकडाउन के कारण परेशान हुए हर वर्ग का सरकार ने ध्यान रखा लेकिन आटोचालकों को भूल गई. आटोचालकों ने सरकार के हर निर्देश का माना और अपने वाहन सड़क पर नहीं उतारे. अकेले नागपुर शहर में 19,000 आटोचालक है. कुछ लोगों को छोड़ दिया जाये तो अधिकांश आटोचालक अब भी सरकारी आदेश का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में परिवार पालना दूभर हो गया है. उस पर आटो लोन की किश्तें और ब्याज जान देने पर मजबूर कर रही है.

परमिट-पासिंग सिस्टम कर रहा परेशान
इसके अलावा शिष्टमंडल ने आरटीओ में जारी परिमट और पासिंग सिस्टम को भी परेशान करने वाला बताया. भालेकर ने परब को बताया कि नागपुर में 19,000 आटो है और प्रतिदिन केवल 30 ही आटो की पासिंग हो पाती है. ऐसे में प्रतिवर्ष 7200 ही आटो पास हो पाते है. पासिंग की यह धीमी गति बाकी 12,000 आटोचालकों को कानून तोड़न पर मजबूर करते हैं. इसके अलावा परमिट के नवीनीकरण के लिए विलंब शुल्क 200 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये करने पर भी विरोध दर्ज किया गया. इस अवसर पर राजू इंगले, प्रिंस इंगोले, रवि सुखदेवे, प्रकाश साखरे, किशोर इलमकर, आनंद मानकर, किशोर सोमकुंवर, अमोद आष्टनकर, आतिश शेंडे आदि की उपस्थिति रही.