Fathers Day

  • पिता के आशीर्वाद से धन्य हो जाता है जीवन

नागपुर. खिलौना भी पापा, बिछौना भी पापा, जब सीने से लगता है प्रतिबिंब अपना सा तो पापा के दिल को लगता है कोई सपना सा. बच्चों को खुश करने के लिए वे बन जाते हैं खुद खिलौना. अगर नींद आ जाए उनको तो बन जाते हैं बिछौना. कभी कंधों पर बिठाकर दिखाते हैं सारा जहां तो कभी अंगुली पकड़कर सहारा बन जाते हैं. यहां मिलता है उसे सुकून भी और सुरक्षा का अनकहा विश्वास भी.

भारतीय संस्कृति में मान्यता है कि यदि पिता का आशीर्वाद बालक व बालिका को मिल जाता है तो समझों उसका जीवन पूरी तरह से धन्य हो जाता है. पिता सदा अपनी संतान का भला ही चाहता है. पिता के जीवन से ही संताने अपना आगे का मार्ग चुनती हैं. पिता सर्वोपरि है. हर वर्ष जून महीने के तीसरे रविवार को पिता दिवस यानी फादर्स डे मनाया जाता है. इसे देखते हुए एकदिन पहले से ही सोशल मीडिया पर फादर्स डे छा गया.

सदैव रहा है उच्च स्थान
साहस, त्याग, बल और अनुशासन के साथ करुणा, वात्सल्य और प्रेम को यदि एक शब्द में लिखना तो पिता लफ्ज काफी है. उनके कंधे जितने मजबूत हैं उतना ही कोमल मन है. उनकी अंगुली पकड़कर हम धरती को पहली बार अपने पैरों से स्पर्श करते हैं. उनके बाज़ुओं में लिपटे हुए इत्मीनान हो जाता है हमें अब हम सुरक्षित हैं.

पीठ पर हाथ रख दें तो मन इस विश्वास से भर जाता है कि अब जीवन का हर युद्ध जीत लेंगे हम. जिन मजबूत अंगुलियों को थामकर बच्चे चलना सीखते हैं, उन पर सिलवटें पड़ जाती हैं, लेकिन फिर भी उनका साथ बच्चों को अपार शक्ति से भर देता है.  हिंदू धर्म और सभ्यता में पिता को सदैव उच्च स्थान दिया गया है. पिता भले ही कभी मां की तरह खुलकर बच्चों के प्रति अपने प्यार को जाहिर नहीं करता है लेकिन उनकी जिंदगी का मकसद अपने बच्चे की तरक्की और खुशहाली ही रहती है. उनकी डांट में जो मिठास होती है वो बड़े हो जाने पर समझ आती है.

दिखाते हैं सही राह
नीतू शाह कहती हैं कि वह पिता ही है, जिसने उंगली पकड़ कर चलना सिखाया, अपनी नींद देकर हमें सुलाया, अपने आंसू छिपा के हंसना सिखाया, मेरी छोटी सी खुशी के लिए सब कुछ सहते रहे. भले जुबां से हमने कुछ ना कहा, लेकिन वो सही रास्ता दिखाते रहे और हम चलते रहे. मंजिल तक कब पहुंच गये, पता हीं नहीं चला.