धर्मांतरण के लिए सिंडिकेट को करोड़ों रुपयों की फंडिंग

    •  नागपुर में भी शुरू होना था दावाह सेंटर
    • यूपी एटीएस की रिमांड में हो सकते हैं बड़े खुलासे

    नागपुर. शहर में कुछ ऐसे सिंडिकेट सक्रिय हैं जो अवैध रूप से बड़े स्तर पर धर्मान्तरण के काम को अंजाम दे रहे हैं. इस मामले में यूपी एटीएस ने बीते शुक्रवार को नागपुर में छापेमारी करके सिंडिकेट के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया था. बताया जाता है कि नागपुर में सिंडिकेट के इन सदस्यों द्वारा धर्मांतरण केंद्र शुरू करने की पूरी तैयारी की गई थी. इसके लिए करोड़ों रुपयों की फंडिंग की गई.लेकिन एनवक्त पर यूपी एटीएस ने उनके प्लान पर पानी फेर दिया.

    बताया जाता है कि इस सिंडिकेट का सरगना मोहम्मद उमर गौतम है, जो दिल्ली के जामियानगर इलाके का रहने वाला है. पहले उसने खुद मुस्लिम धर्म अपनाया बाद में दूसरे लोगों के धर्मांतरण के काम में जुट गया. यूपी एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि उमर के इस एजेंडे को महाराष्ट्र में बढ़ावा देने के लिए गणेशपेठ निवासी प्रकाश कांवरे उर्फ एडम, चामोर्शी, गड़चिरोली निवासी भूप्रियबंडो देवीदास मानकर उर्फ अर्सलान मुस्तफा और कौसर आलम शौकत अली की नियुक्ति की गई थी. फिलहाल तीनों से यूपी एटीएस पूछताछ कर रही है. इसमें धर्मान्तरण से जुड़े राज उजागर होने की संभावना बताई जा रही है. न्यायालय ने उन्हें 7 दिन की पुलिस हिरासत में रखने के आदेश दिए है. 

    हवाला के जरिए 145 करोड़ की फंडिंग  

    धर्मान्तरण के मामले में पकड़े गए तीनों आरोपी वर्ष 2018 में उमर के संपर्क में आए थे. इनको नागपुर दावाह शुरू करने सहित धर्मांतरण के लिए लोगों को तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. बताया जाता है कि उमर को धर्मांतरण और देश के विभिन्न हिस्सों में दावाह शुरू करने के लिए सउदी अरब से 145 करोड़ रुपये की फंडिंग हुई थी. यह फंडिग हवाला के जरिए की जाती है. रकम के आदान-प्रदान का जिम्मा कौसर आलम का था. वह बीज का व्यवसाय करता है और व्यापारी की आड़ में फंडिंग के पैसों को अलग-अलग राज्यों में सिंडिकेट से जुड़े लोगों को पहुंचाता है. 

    आर्थिक रूप से कमजोर लोग रहते थे निशाने पर

    जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों की मानें तो एडम और विपुल विजयवर्गीय ने चामोर्शी के अर्सलान के मन में अपने समाज के प्रति द्वेश पैदा किया. बाद में उसका ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण के काम में लगाया गया है. वह ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब नागरिकों को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करता था. पिछले कुछ समय से वह नागपुर के हंसापुरी परिसर में रह रहा था और हिजामा (कपिंग थैरेपी) के जरिए लोगों का इलाज करता था. आर्थिक रूप से कमजोर लोग उसके पास उपचार लेते थे और इसी दौरान वह लोगों को अपने जाल में फंसाता था. 

    लगातार था विजयवर्गीय के संपर्क में

    अर्सलान लगातार एडम और विपुल विजयवर्गीय के संपर्क में था. विपुल विजयवर्गीय वही है जिसे 2 जून को गाजियाबाद के दासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिम्हानंद सरस्वती की हत्या की साजिश में गिरफ्तार किया गया था. विपुल ने कई वर्ष पहले अपना धर्म परिवर्तन कर लिया था. मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद मां और बहन ने उसे घर से निकाल दिया. तब से वह इस्लाम धर्म के प्रचार-प्रसार और धर्मांतरण के कार्य में जुटा हुआ है. उसी ने एडम उर्फ प्रकाश कांवरे का भी धर्म परिवर्तन करवाया था. 

    मंदिर में प्रवेश के लिए छुपाया था नाम 

    आरोप है कि 2 जून को विपुल अपने साले काशिफ खान के साथ दासना मंदिर में महंत नरसिम्हानंद को मारने गया था. काशिफ ने मंदिर के प्रवेश द्वार पर अपना नाम काशी गुप्ता लिखवाया था. जबकि विपुल के नाम पर किसी को संदेह नहीं हुआ. इस मंदिर प्रवेश द्वार पर भी मुस्लिम धर्म के लोगों को प्रवेश वर्जित होने का सूचना फलक लगा हुआ है. दोनों के बैग में सर्जिकल ब्लेड और सफेद रंग का कोई पदार्थ मिला था.

    दिये जाते है तरह-तरह के प्रलोभन

    धर्म परिवर्तन करवाने वाले इस सिंडिकेट में विभिन्न क्षेत्रों के लोग जुड़े हैं. धर्म परिवर्तन के लिए लोगों को तरह-तरह के लालच दिए जाते हैं. यह काम ऐसे लोगों को सौंपा गया है जो धर्म परिवर्तन करवाने के बाद भी अपना नाम नहीं बदलते हुए अन्य धर्मों के लोगों के बीच रहते हैं. वहां अपने ही धर्म के प्रति लोगों के मन में द्वेश पैदा करते हैं.  उनको बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजगार के साधन उपलब्ध करवाने और धर्मांतरण करने पर एक मुश्त रकम देने का लालच भी दिया जाता है.

    मूक-बधिर युवाओं को उज्वल भविष्य के सपने दिखाए जाते है. साइन लैंग्वेज में उनसे बात की जाती है और किसी को समझ नहीं आता कि आखिर चल क्या रहा है. दिल्ली में इस तरह के कई मामले सामने आए है. जिसमें परिजनों को पता नहीं चला और बच्चे ने धर्मांतरण कर लिया. नागपुर में भी इस तरह कितने लोगों का धर्मांतरण करवाया गया इसकी जांच की जा रही है. 

    RSS के गढ़ में लगी सेंध

    नागपुर आरएसएस का हेड क्वार्टर है. ऐसे में धर्म परिवर्तन करवाने वाले इस सिंडिकेट ने आरएसएस के गढ़ में ही सेंध लगा दी है. बताया जाता है कि नागपुर में भी बड़ी संख्या में लोगों से धर्म परिवर्तन करवाया गया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके लिए कानून बनाया है लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा कोई कानून नहीं है. यहां धर्मांतरण करना या करवाना कोई गैरकानूनी काम नहीं है. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया. केवल नाम बदलने पर गैजेट जारी होने के बाद ही एजेंसियां धर्म परिर्वतन करने वालों की जांच कर रही है.