Arun Gawli
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  • विभागीय आयुक्त और जेल अधीक्षक से मांगा जवाब

नागपुर. जेल में बंद अरुण गवली ने पत्नी की बीमारी को लेकर कुछ दिनों के लिए पैरोल का अवकाश प्रदान करने की मांग करते हुए विभागीय आयुक्त के पास अर्जी दी थी. किंतु 3 मार्च 2021 को विभागीय आयुक्त की ओर से अर्जी को ठुकरा दिया गया जिससे अब उसने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है.

याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश झका हक और न्यायाधीश अमिल बोरकर ने विभागीय आयुक्त और जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर 9 अप्रैल तक जवाब दायर करने के आदेश दिए. गवली की ओर से अधि. अली ने पैरवी की.

बम धमाकों के आरोपियों ने भी मांगा इमरजेंसी पैरोल

मुंबई बम धमाकों में सजा भुगत रहे असगर कादर शेख और मो. याकूब नागुल ने भी इमरजेंसी पैरोल की मांग करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधि. मीर नागमन अली ने कहा कि मुंबई पैरोल एंड फरलो रूल्स में किए गए संशोधन के अनुसार सजा भुगत रहे कैदियों को इमरजेंसी पैरोल पर किया जा सकता है. कोविड-19 महामारी को देखते हुए याचिकाकर्ताओं को इस संशोधन के अनुसार इमरजेंसी पैरोल देने का अनुरोध अदालत से किया गया.

उल्लेखनीय है कि दोनों कैदी 1997 के मुंबई बम धमाके में सेंट्रल जेल में सजा भुगत रहे हैं. हालांकि जेल अधीक्षक से इमरजेंसी पैरोल देने का अनुरोध किया गया था किंतु उन्होंने अर्जी ठुकरा दी. जेल अधीक्षक का मानना था कि चूंकि दोनों कैदी विशेष एक्ट के अंतर्गत दोषी पाए गए हैं, अत: उन्हें इमरजेंसी पैरोल नहीं दिया जा सकता है.