GMR company issued notice to high court, government issued notice

    नागपुर. डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रस्तावित विस्तार योजना को लेकर भले ही सरकार की ओर से ठेका आवंटित किया गया हो लेकिन अब अचानक ही ठेका रद्द किए जाने को चुनौती देते हुए जीएमआर कम्पनी की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. बुधवार को याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से कहा कि लंबे समय से मसला हाई कोर्ट के विचाराधीन है लेकिन अब केंद्र सरकार नागपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निजीकरण की दिशा में बढ़ रही है.

    यहां तक कि इसके लिए सलाहकार की नियुक्ति की जा चुकी है. अत: थर्ड पार्टी की दखलंदाजी होने से पहले अदालत में लंबित याचिका पर फैसला करने का अनुरोध किया. सरकारी पक्ष की ओर से हलफनामा पेश करने के लिए समय देने का अनुरोध किए जाने के बाद न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अनिल किल्लोर ने 1 जुलाई को 2.30 बजे अंतिम सुनवाई करने के आदेश दिए. 

    …तो राहत की करें मांग

    बुधवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने अदालत से कहा कि हवाई अड्डे का निजीकरण करने के लिए सलाहकार नियुक्त किया जा चुका है. इस तरह की खबरें प्रकाशित हो रही हैं. हालांकि 1 जुलाई को अंतिम सुनवाई तो होगी लेकिन इस दौरान यदि थर्ड पार्टी की दखलंदाजी निश्चित की गई तो याचिकाकर्ता के लिए अड़चन होगी. अत: उस समय राहत देने की मांग का विकल्प होना चाहिए.

    इसके बाद अदालत ने ऐसी समस्या उत्पन्न होने पर राहत के लिए मांग करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की. गत सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि सरकार की ओर से ठेका आवंटित करने के बाद याचिकाकर्ता कम्पनी की ओर से यहां पर कार्यालय भी स्थापित कर दिया है. यहां तक कि पूरी तैयारियां की जा चुकी हैं लेकिन अब अचानक ही ठेका रद्द किया गया.

    विरोध करते हुए अधि. भांगडे ने कहा कि सरकार की ओर से गत वर्ष ही इस संदर्भ में निर्णय लिया गया है, जबकि वर्तमान में कोई नया निर्णय नहीं लिया गया. इस पर याचिकाकर्ता का मानना था कि चूंकि कम्पनी ने पूरी तैयारियां कर ली हैं, अत: कम से कम याचिका पर फैसला होने तक सरकारी फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी. इस पर अदालत ने रोक लगाने से इनकार कर यदि कोई नया टेंडर जारी किया जाता है तो वह अदालत के फैसले के अधीन होने के आदेश भी दिए. 

    1 जुलाई को होगा फैसला

    • अदालत ने भले ही रोक लगाने से इनकार किया लेकिन याचिकाकर्ता के अनुरोध पर 1 जुलाई को अंतिम सुनवाई करने के आदेश दिए. याचिका में बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार के लिए निविदा जारी किए जाने के बाद लगभग 13 कम्पनियों ने हिस्सा लिया था. 
    • जीएमआर कम्पनी सहित अन्य 4 कम्पनियों की तकनीकी बोली के लिए चयन किया गया. हवाई अड्डे का प्रारूप, विकास योजना, प्रवासी परिवहन का प्रमाण, हवाई अड्डे से होने वाली व्यावसायिक आय जैसे मुद्दों के साथ राज्य सरकार को होने वाली कुल आय में हिस्सेदारी पर दिए गए इच्छापत्र के अनुसार कम्पनी का चयन किया गया था. 
    • जीएमआर कम्पनी को मार्च 2019 में ही ठेका आवंटित किया गया था जिसके बाद एमजीआर ने एसपीवी के लिए भागीदार कम्पनी का भी चयन किया. कार्य शुरू करने के संदर्भ में राज्य सरकार को कई बार पत्र भेजा गया लेकिन 16 मार्च को राज्य सरकार की ओर से टेंडर की प्रक्रिया ही रद्द करने का निर्णय लिया.