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  • राकां ने किया पेट्रोल-डीजल दर वृद्धि का विरोध

नागपुर. पेट्रोल अब तक के सबसे ऊंची दर पर पहुंच गया है. नागपुर में यह 90.62 रुपये लीटर हो गया है तो डीजल 80.86 रुपये लीटर पर पहुंच गया है. मनमाने तरीके से पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी को राष्ट्रवादी कांग्रेस के शहर अध्यक्ष अनिल अहिरकर ने जनता की जेब पर सरकारी डाका बताया है. उनके नेतृत्व में तेल की कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी के विरोध के लिए धरना आंदोलन किया गया. इस दौरान केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. अहिरकर ने कहा कि केन्द्र सरकार की गैरजिम्मेदाराना आर्थिक नीति के चलते ईंधन दाम दिन पर दिन ऊपर जा रहे हैं, लोगों का बजट बिगड़ रहा है.

पिछले वर्ष पेट्रोल 80 रुपये लीटर था जो अब 90 रुपये के ऊपर चला गया है. यह अब तक के उच्चांक पर है लेकिन सरकार आंख-कान बंद कर बैठी हुई है. आंदोलन में जानबा मस्के, अशोक काटले, मिलिंद मानापुरे, श्रीकांत शिवणकर, महेंद्र भांगे, अविनाश शेरेकर, नूतन रेवतकर, धनंजय देशमुख, प्रकाश लिखाणकर, सुखदेव वंजारी, सुरेश करणे, चंद्रकांत नाईक, मेहबूब पठान, अमोल धनुषकर, नंदकिशोर माहेश्वरी, नागेंद्र आठवणकर, विनोद कावले, मोरेश्वर जाधव, नागेश वानखेडे, धर्मपाल वानखेड़े, सुनीता जुमले, राकेश गजभिये, शाईन शेख, फारुक शेख, रफीक शेख, सुनीता पांडे, नीता पांडे, सुनीता विभुते, ललिता पवनकर, नितिन गोड़घाटे, मीना मसराम, चंदू तुपकर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए.

डेढ़ गुना बढ़ गई महंगाई

अहिरकर ने कहा कि पेट्रोल का दाम बढ़ने से आम जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं डीजल के दाम 81 रुपये के करीब पहुंचने से ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ गए हैं. इससे अनाज, तेल, सब्जी, फल व अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों काफी बढ़ोतरी हो गई है. महंगाई करीब डेढ़ गुना बढ़ गई जबकि आम नौकरीपेशा लोगों और छोटे-छोटे काम-धंधा करने वालों की आय उतनी ही बनी हुई है. लोगों को घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है. केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के चलते देश में बेरोजगारी भी बढ़ गई है. उद्योग बंद हो गए हैं और दूसरी ओर निजीकरण के चलते कर्मचारी वर्ग भयभीत है. किसान आंदोलन चल रहा है. छिपे तौर पर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर सरकार जनता की जेब पर डाका डालने का काम कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं किए गए तो राकां तीव्र आंदोलन करेगी.