Representational Pic
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  • सर्वाधिक नये वोटर इस बार करेगे मतदान

नागपुर. स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में 7 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिये. इस तरह अब मैदान में 19 उम्मीदवार डटे हुये हैं. कोविड काल के दौरान हो रहे चुनाव को लेकर एक ओर जहां उम्मीदवारों में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर पहली बार बने मतदाताओं में सक्रियता नजर आ रही है. हालांकि पिछले चुनाव की तुलना में इस बार मतदाता कम हुये हैं, लेकिन सबसे अधिक नये मतदाता होने से चुनावी समीकरण भी बदलने की उम्मीद है.

चुनाव में विभाग के 6 जिलों के स्नातक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेगे. मंगलवार को नाम वापस लेने के अंतिम दिन तक 7 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी छोड़ दी. इनमें निर्दलीय संदीप जोशी, धर्मेश फुसाटे, गोकुलदास पांडे, शिवाजी सोनसरे, सचिदानंद फुलेकर, लोकभारती के प्रा. किशोर वरभे व निर्दलीय रामराव ओमकार चव्हाण का समावेश रहा. इस तरह अब मैदान में कुल 19 उम्मीदवार डटे हुये हैं. यही वजह है कि इस बार चुनाव रोचक होने की पूरी उम्मीद है. महाविकास आघाडी की ओर से एड अभिजीत वंजारी, भाजपा से महापौर संदीप जोशी, सीनेट परिवर्तन पैनल से प्रा प्रशांत डेकाटे, निर्दलीय नितिन रोंघे सहित अन्य उम्मीदवार मैदान में डटे हुये हैं. 

युवा मतदाताओं पर नजर

पिछले चुनाव में विभाग में 2.84 लाख मतदाता थे. जबकि इस बार संख्या कम हुई है. मंगलवार तक विभाग में कुल 2 लाख 6000 मतदाताओं का पंजीयन हो सका है. हालांकि गत चुनाव की तुलना में संख्या कम है, लेकिन अधिकांश मतदाता पहली बार पंजीकृत हुये हैं. वहीं माना जा रहा है कि यही नये मतदाता चुनावी समीकरण को बनाने में मददगार साबित होगे. यह पहली दफा होगा जब उम्मीदवारों के नाम फोटो सहित सूची में होगे. वहीं नाम मराठी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दिया गया है. अधिकांश नये मतदाता होने की वजह से ही इस बार चुनाव में उत्साह नजर आ रहा है. उम्मीदवारों की नजरें भी युवा और नये मतदाताओं पर ही टीकी हुई है. 

कोविड काल में अनेक पाबंदियां

इस बार उम्मीदवारों को प्रचार के लिए अधिक वक्त नहीं मिला है. 1 दिसंबर को मतदान की तिथि तय की गई है. इस लिहाज से देखा जाये तो करीब 15 दिन ही मिलते हैं. कुछ उम्मीदवारों ने पहले से ही अंदरुनी प्रचार शुरू कर दिया था. कोरोना काल में विविध तरह के नियमों के साथ प्रचार करने की अनिवार्यता रखी गई है. इस बार चुनाव में युवा उम्मीदवारों की संख्या अधिक है. यही वजह है कि वोटिंग भी हर बार की तुलना में अधिक होने की उम्मीद है. उल्लेखनीय है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर अब तक भाजपा का दबदबा कायम रहा है.