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  • बावनकुले के आरोपों को कांग्रेस ने किया खारिज

नागपुर. पालक मंत्री पर जिले को कोरोना के साये में अपने हाल पर छोड़कर तमिलनाडु चुनाव प्रचार में चले जाने के आरोप को प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सिरे से खारिज कर दिया है. प्रेस परिषद में कमेटी के प्रवक्ता संजय दुबे ने कहा कि पूर्व मंत्री बावनकुले ने पालक मंत्री पर आरोप लगाया है कि जिले को कोरोना संकट में छोड़कर वे चुनाव में प्रचार के लिए चले गए. दुबे ने कहा कि यह सच है कि पार्टी ने उन्हें जिम्मेदारी दी है और वे उसे अच्छी तरह निभा रहे हैं लेकिन यह बिल्कुल गलत है कि उन्होंने नागपुर को अपने हाल पर छोड़ दिया है.

पालक मंत्री ने कोरोना को मात देने के लिए विविध विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकें लेकर रणनीति तैयार की और उपाययोजनाओं का नियोजन किया. जनता की जान बचाने के लिए अनेक कठोर निर्णय भी लिये. अर्थव्यवस्था भी नियमित चलती रहे इसके लिए व्यापारियों से बैठक लेकर योजनाबद्ध तरीके से लॉकडाउन लागू किया. तमिलनाडु व मुंबई में रहते हुए भी वे प्रशासकीय अधिकारियों से सतत संपर्क में हैं और हालातों की समीक्षा करते हुए दिशानिर्देश दे रहे हैं.

स्वास्थ मंत्री, मुख्यमंत्री से संपर्क में हैं. टेस्टिंग, वैक्सीनेशन व अस्पतालों में बेड की व्यवस्था भी तेजी से बढ़ाई है. दुबे ने कहा कि बावनकुले द्वारा लगाया गया आरोप निराधार है. प्रेस परिषद में के.के. पांडेय, हरिभाऊ किरपाने, रत्नाकर जयपुरकर, ठाकुर जग्यासी, सुरेश जग्यासी, मूलचंद मेहर, नरेन्द्र जिचकार, रेखा लांजेवार, विजयलक्ष्मी हजारे उपस्थित थे.

सारे मंत्री कहां गए : खोपड़े

इधर, भाजपा विधायक कृष्णा खोपड़े ने भी आरोप लगाया है कि सिटी व जिले के सारे अस्पताल हाउसफुल हो गए हैं. गरीबों को उपचार के लिए बेड नहीं मिल रहा है. ऐसे संकट के समय में पालक मंत्री जिले के नागरिकों की चिंता करने की बजाय तमिलनाडु में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं. उन्होंने यह भी कहा कि निजी अस्पतालों में कुछ बेड कब्जे में लेकर मुख्यमंत्री सहायता निधि से गरीबों को उपचार की सुविधा देने की व्यवस्था करें. उन्होंने सवाल उठाया कि पालक मंत्री चुनाव में व्यस्त हैं तो जिले के बाकी मंत्री कहां हैं. क्या उन्हें अपने जिले के नागरिकों की चिंता नहीं है.