Corona
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  • कोरोना में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर

नागपुर. एक ओर सिटी में कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है, दूसरी ओर रिकवरी रेट भी बढ़ रहा है. कम लक्षण वाले पॉजिटिव मरीजों को जहां होम क्वारंटाइन करने का नियम है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी अब इस महामारी में सामने आ रही है. ऐसी ही एक घटना नरसाला पीएचआरसी के अंतर्गत घटी. वहां एक मरीज कोरोना पॉजिटिव पाया गया था लेकिन उसे क्वारंटाइन करने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी महीना भर बाद आये. नरसाला के राधा रमन कॉलोनी के एक अपार्टमेंट की यह घटना है.

इस अपार्टमेंट में एक कुल 10 फ्लैट्स हैं. कॉलोनी निवासी मधुकर तितरमारे (62) ने बुखार आने के बाद 25 अगस्त को नरसाला पीएचआरसी में कोरोना टेस्ट की थी. उनके साथ उनके ही अपार्टमेंट के राजेश बावनकर ने भी टेस्ट की थी. 2 दिन बाद आए परिणाम में बावनकर निगेटिव तथा तितरमारे पॉजिटिव पाये गये. उसके बाद उन्होंने खुद को होम क्वारंटाइन कर लिया था.

इस कालावधि में इसी कॉलोनी के अन्य एक फ्लैट में एक अन्य व्यक्ति भी कोरोना पॉजिटिव मिला था, जो निजी अस्पताल में उपचार के बाद घर लौटा. उस समय उस व्यक्ति के घर पर तो स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ का बैनर लगाया लेकिन तितरमारे के घर को शायद भूल गये. टेस्ट का परिणाम आने के बाद महीना खत्म होने को महज 2 दिन बचे थे, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को याद आई और वे तितरमारे के यहां दाखिल हुए.

निजी चिकित्सक से लिया उपचार
आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि पॉजिटिव पाये जाने के बाद तितरमारे की ओर मनपा स्वास्थ्य कर्मियों का ध्यान ही नहीं गया. इतना ही नहीं, उन्हें प्रतिबंधात्मक गोलियां मुहैया नहीं कराई गईं. उनके परिवार वालों ने 2 दिन राह देखी. बाद में निजी चिकित्सक की सलाह पर दवाई लेते हुए कोरोना संक्रमण से उबर भी गये.

मंगलवार को वे जब किसी काम से बाहर गये ते तब स्वास्थ्य कर्मी ‘कोविड प्रतिबंधित क्षेत्र’ का बैनर लगाने पहुंचे. तब फ्लैट के निवासियों ने उन्हें हड़काया. तब जाकर वे कर्मचारी बिना कुछ प्रतिक्रिया व्यक्त किये लौट गये.

हालांकि उन्होंने सभी फ्लैटवासियों के नाम रजिस्टर में दर्ज करने की खानापूर्ति मात्र की. एक ओर प्रतिबंधक क्षेत्र का बोर्ड लगने के बाद भी पॉजिटिव मरीज बाहर घूम रहा है, उस पर किसी का नियंत्रण नहीं है. दूसरी ओर 6२ वर्षीय इस वृद्ध व्यक्ति को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया न कराते हुए अपने हाल पर छोड़ना कहां तक उचित है, यह सवाल यहां के निवासियों ने किया है.