Court approves sacking of 12 Manpa employees, High Court validates Munde's decision

    • 1,584 मरीज अब तक हुए बाधित
    • 830 मरीजों का हुआ उपचार
    • 74 की निकालनी पड़ी आंखें

    नागपुर. कोरोना महामारी की त्रासदी और उपायों को लेकर हाई कोर्ट की ओर से स्वयं संज्ञान लेकर इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकृत किया. बुधवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान ब्लैक फंगस की सिटी में वर्तमान स्थिति को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से जानकारी प्रेषित की गई. जिसमें बताया गया कि ब्लैक फंगस के अब तक कुल 1,584 लोग बाधित हुए हैं. 830 मरीजों का उपचार किया जा चुका है. कुछ लोग अधिक बाधित होने के कारण ऐसे 74 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं हैं.

    हलफनामा में उजागर जानकारी पर अदालत ने चिंता जताते हुए ब्लैक फंगस के उपचार के लिए आवश्यक दवा बनानेवाली कम्पनियों को हरसंभव सहयोग करने के आदेश जारी किए. अदालत ने कहा कि दवा उत्पादन के लिए अधिकांश कच्चा माल विदेश से आयात करना होता है. जिसके लिए विशेष रूप से केंद्र सरकार से मंजूरी की आवश्यकता पड़ती है.

    वर्तमान स्थिति के अनुसार अब ब्लैक फंगस न केवल आम होता जा रहा है, बल्कि महामारी के रूप में फैलता जा रहा है. अदालत मित्र के रूप में अधि. श्रीरंग भांडारकर, आईएमए की ओर से अधि. भानुदास कुलकर्णी, इंटरविनर की ओर से अधि. अनिलकुमार मुलचंदानी ने पैरवी की.

    देश में महामारी का घातक रूप

    अदालत ने ब्लैक फंगस को लेकर देश के कोने-कोने से उजागर हो रहे मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते सचेत नहीं हो पाए तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिसे विरला माना जा रहा था, वह देश के महामारी का घातक रूप ले सकता है. यहीं कारण है कि केंद्र और राज्य सरकार को बार-बार इसकी रोकथाम के लिए तुरंत कारगर उपाय करने को कहा जा रहा है. ब्लैक फंगस से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध होनी चाहिए.

    हर किमत पर अम्फोटेरिसिन बी (लिपिड कॉम्प्लेक्स) और अम्फोटेरिसिन (लिपोसोमल) के अलावा इचिनोकैनडियन जैसी तीनों दवाएं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश केंद्र और राज्य सरकार को दिए. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से दायर अर्जी में विदेशों से कच्चा माल आयात करने के संदर्भ में कुछ जानकारी उजागर की गई.

    जिस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि इसके पूर्व उजागर जानकारी से अलग जानकारी नहीं है. किसी भी ठोस तरह की जानकारी नहीं दी गई है. केवल दवा का उत्पादन बढ़ने की संभावना जताई गई है.

    केंद्र को लगाई फटकार

    केंद्र सरकार की औपचारिकता पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अदालत ने सुनवाई के दौरान फटकार भी लगाई. अदालत ने कहा कि 5 कम्पनियों की ओर से जून तक 2,55,114 वायल्स का उत्पादन करने की जानकारी दी गई है. यहां तक कि जून अंत तक 1,02,000 वायल्स का उत्पादन बढ़ने की मौखिक जानकारी दी जा रही है.

    लेकिन राज्य में मरीजों की संख्या को देखते हुए इन दवाओं की आपूर्ति कैसे होगी, इसका कोई लेखाजोखा उजागर नहीं किया जा रहा है. आवंटन को लेकर भले ही कुछ भी प्रक्रिया अपनाई जाए लेकिन विशेष रूप से नागपुर में मरीजों की संख्या को देखते हुए दवा के लिए रोने जैसी स्थिति है. नागपुर के अधिकांश हिस्से में मरीजों को प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध नहीं हो सकेगी. 

    जिम्मेदारी नहीं निभा रही सरकार

    अदालत ने आदेश में कहा कि ब्लैक फंगस के कारण कई मरीजों को अपने अंग खोना पड़ रहा है. कई मरीज अपनी आंखें खो रहे हैं. जबकि कुछ मरीजों की जान जा रही है. महाराष्ट्र में दवा की कमी के चलते इस तरह का चित्र है. केंद्र सरकार को इसकी भलीभांति जानकारी भी है. लेकिन मूलभूत दायित्व होने के बावजूद संवैधानिक जिम्मेदारी के बाद भी आशा के अनुरूप कार्य को अंजाम नहीं दिया जा रहा है.

    निश्चित ही कुछ भी नहीं किया जा रहा, ऐसा अदालत का मानना नहीं है. लेकिन अब तक वास्तविक रूप में कुछ दिखाई नहीं दिया है. जल्द ही इस संदर्भ में केंद्र सरकार की ओर से सकारात्मक जवाब मिलने की आशा भी अदालत ने जताई. 

    कंपनियों ने कोर्ट को भेजा पत्र

    • ब्लैक फंगस की इस विपदा में विदेशों से कच्चा माल आयात करनेवाली एक कम्पनी ने मदद करने की इच्छा जताई. साथ ही कच्चा माल आयात करने में आ रही समस्या की जानकारी भी उजागर की.
    • कम्पनी के अनुसार यदि रुकावटें खत्म की गई तो इस विपदा से निपटने के लिए देश के उत्पादक ही पर्याप्त है. यूनिजूल्स लाइफ साइंसेज लि. कम्पनी की ओर से भी पत्र भेजा गया. जिसे अदालत मित्र के माध्यम से सुनवाई के दौरान रखा गया.
    • इस कम्पनी ने भी मेसर्स अरको लाइफसाइंसेस इंडिया प्रा. लि. कम्पनी जैसी ही त्रासदी उजागर की. आयातकर्ता कम्पनियों के अनुसार ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के स्तर पर निजी कम्पनियों को पंजीकृत नहीं किया जा रहा है. 
    • अदालत ने केंद्र सरकार को तुरंत हरकत में आकर कदम उठाने के आदेश दिए. साथ ही अगली सुनवाई के दौरान इसे अदालत के समक्ष रखने के भी आदेश दिए.