Court approves sacking of 12 Manpa employees, High Court validates Munde's decision

नागपुर. आय से अधिक सम्पत्ति को लेकर बर्डी थाना में दर्ज मामले में अंतरिम जमानत के लिए डॉ. प्रवीण गंटावार और शीलू गंटावार की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. इस पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील द्वारा समय मांगे जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए न्यायाधीश रोहित देव ने अनुरोध को अनुचित करार देते हुए जिला पुलिस कल्याण निधि में 25,000 रु. जमा करने की शर्त पर 10 दिसंबर तक के लिए सुनवाई स्थगित करने के आदेश जारी किए. साथ ही अदालत ने उक्त निधि कोरोना से बाधित हुए पुलिस कर्मचारियों के उपचार पर खर्च करने के भी आदेश जारी किए. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. प्रसाद अभ्यंकर और सरकार की ओर से अधि. नितिन रोडे ने पैरवी की. अदालत का मानना था कि गत समय भी याचिका सुनवाई के लिए रखी गई थी, किंतु फिजिकल हियरिंग का अनुरोध कर स्थगित किया गया था.

सीनियर एडवोकेट करेंगे पैरवी

अदालत ने आदेश में कहा कि जब मामले को पुकारा गया, तब याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट द्वारा पैरवी करने का हवाला देते हुए सुनवाई स्थगित करने का पुन: अनुरोध किया गया, जबकि याचिकाकर्ता के वकील प्रसाद अभ्यंकर द्वारा काफी समय तक मामले की पैरवी की गई है. ऐसे में अब सुनवाई स्थगित करना कोर्ट की दृष्टि में अनुचित है. अधि. अभ्यंकर का मानना था कि याचिकाकर्ता कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करना चाहते हैं. विशेषत: सरकारी कर्मचारी रहते हुए पद का दुरुपयोग कर गंटावार दम्पति द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति जमा किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसे लेकर भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग की ओर से कार्रवाई की गई.

2.52 करोड़ अधिक आय

अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग (एसीबी) की ओर से गंटावार के रामदासपेठ स्थित निवास और अस्पताल में सघन जांच की गई थी, जिसमें खंगाले गए दस्तावेजों के अनुसार आय से अधिक 2,52,85,762 रु. जमा किए जाने का मामला उजागर हुआ था. इसके बाद एसीबी द्वारा सीताबर्डी पुलिस में मामला दर्ज किया गया. इसी मामले में अंतरिम जमानत के लिए गंटावार दम्पति द्वारा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया.