Vidarbha Rajya Andolan Samiti

नागपुर. विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के बैनर तले सोमवार को नागपुर समेत विदर्भ के 100 से अधिक स्थानों पर नागपुर करार की होली जलाकर कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन किया. इस दौरान पृथक विदर्भ की मांग जोरशोर से उठाई गई.

जबरन किया शामिल
विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के संयोजक राम नेवले ने बताया कि महाराष्ट्र के गठन के वक्त विदर्भ को जबरन शामिल कर विदर्भवासियों के साथ हमेशा ही अन्याय किया है. इस वजह से पूरे विदर्भ में नागपुर करार की होली जलाकर सरकार का निषेध जताया गया. विदर्भ में नागपुर समेत चंद्रपुर, अमरावती, वर्धा, यवतमाल, गोंदिया, भंडारा, गड़चिरोली, अकोला, वाशिम, बुलढाना में कार्यकर्ताओं ने आंदोलन कर अपना विरोध जताया.

चलाई अन्याय की श्रृंखला
28 सिंतबर 1953 में विदर्भ को महाराष्ट्र में विलिन कर विदर्भवासियों के साथ अन्याय की श्रृंखला ही चलाई गई. विदर्भ के नाम पर स्थानीय नेताओं ने अपनी राजनीतिक रोटी ही सेंकने का काम किया. विदर्भ में मौजूद 23 प्रकार की खनिज संपत्तियों का शोषण किया गया. विदर्भ के बूते पर पश्चिम महाराष्ट्र समृद्ध बनाने का काम किया गया.

हुई जय विदर्भ की गूंज
विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के कार्यकर्ताओं ने नागपुर स्थित संविधान चौक पर नागपुर करार की होली जलाकर जय विदर्भ का नारा बुलंद किया. इस अवसर पर विभागीय अध्यक्ष मुकेश मासुरकर ने कहा कि नागपुर करार ने विदर्भ को गुलाम बनाने का काम किया है. इसी करार की वजह से विदर्भ की स्वतंत्रता हट गई, युवा बड़ी संख्या में बेरोजगार हुए. महाराष्ट्रवादियों ने हमेशा ही विदर्भ का सोशण करने का काम किया. अब स्वतंत्र विदर्भ राज्य लिए बगैर कार्यकर्ता शांत नहीं बैठेंगे.

नागपुर करार की होली जलाने वाले कार्यकर्ताओं में रेखा निमजे, विष्णू आष्टीकर, सुयोग निलदावार, नितिन अवस्थी, सुनीता येलणे, जे. एस. ख्वाजा, रविंद्र भामोड़े, गणेश शर्मा, प्रीति दीड़मुठे, ज्योति खांडेकर, प्रशांत मुले, गुलाब धांडे, तात्यासाहब मते, रामेश्वर मोहबे, शोभा येवले, नौशाद हुसैन, राजेंद्र सतई, नरेश निमजे, अन्ना राजेधर, राजेश बंडे, जीवन रामटेके, रामभाऊ कावड़कर, रजनी शुक्ला, अशोक नेवले, विजय मौंदेकर माधुरी चौहाण आदि कार्यकर्ताओं का समावेश था.