Girl's dead body found in Agraout the death of anyone in the restricted area

  • परिजनों ने किया रास्ता रोको आंदोलन

नागपुर. कामठी के निजी अस्पताल ने कोरोना रोगी की मौत के बाद इलाज के पांच लाख रुपए नहीं देने पर शव को अस्पताल में ही रोके रखा. संतप्त परिजनों ने अस्पताल के सामने हंगामा कर रोड जाम कर दिया. आखिर पुलिस की मध्यस्थता से परिजनों को शव सौंपा गया. जानकारी के अनुसार कामठी के निजी अस्पताल में नागपुर के लष्करीबाग निवासी सतीश महादेवराव तांबे (48) को 28 दिन पहले भर्ती किया गया था.

शुक्रवार को सुबह 9.30 cts उनकी मौत हो गई. मृतक के परिजनों ने इलाज के लिए पहले साढ़े तीन लाख रुपए जमा किए थे. तांबे की मौत के बाद अस्पताल ने परिजनों को और 4 लाख 95 हजार का बिल थमा दिया. पैसा नहीं भरने पर अस्पताल ने शव नहीं देने की बात कही. परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस थाना और तहसीलदार कामठी को लिखित शिकायत दी. लेकिन शाम 5 बजे तक शव नहीं देने से परिजन संतप्त हो गए और उन्होंने रास्ता रोको आंदोलन शुरू कर दिया.

नवीन कामठी के थानेदार संतोष बकाल, दुय्यम निरीक्षक राधेश्याम पाल ने घटना स्थल पर जाकर डॉक्टरों और परिजनों के बीच अध्यस्थता की और परिजनों को शव दिलाया. बजाया जाता है कि इसी अस्पताल ने इससे पहले भी एक कोरोना मरीज की मौत होने पर बिल के लिए शव रोक लिया था. तब जिलाधिकारी रवीन्द्र ठाकरे और तत्कालीन तहसीलदार अरिवंद हिंगे ने अस्पताल को कारईवाई करने का नोटिस दिया था.