File Photo
File Photo

  • राज्य सरकार को योजनाओं पर करना होगा अमल

नागपुर. राज्य की शिक्षा मंत्री जहां राज्य में जीरो ड्रॉप आउट योजना के तहत स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस स्कूल में दाखिल कराने के लिए विभिन्न प्रयास कर रही हैं, वहीं  राज्य में ड्रॉप रेट सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा है. योजनाओं का कार्यान्वयन करने की जरूरत है. प्रदेश में ड्रॉप आउट रेट अभी भी ठीक नहीं हो रहा है. नीति आयोग द्वारा जारी की गई सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में हर वर्ष औसतन 11.28 फीसदी बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं. ये आंकड़ा प्रदेश में बच्चों के भविष्य की चिंताओं को बढ़ाने के लिए काफी है. प्रदेश में जहां हर वर्ष बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं, वहीं ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल तक दोबारा लाने के लिए कोई प्रयास भी नहीं किया जा रहा है. जो प्लानिंग बन रही है वह भी केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है. ऐसे में बचपन की चिंता देश के भविष्य को भी अंधकार में डाल सकती है. हैरानी की बात ये है कि आज भी राज्य में सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट स्टूडेंट्स की लिस्ट में बेटियों की संख्या ज्यादा है, जबकि हम ‘बेटी-बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ का नारा दे रहे हैं. बेटियों की शिक्षा में हम आज भी कोसों दूर हैं. नीति आयोग द्वारा तय किए गए लक्ष्य को सिर्फ 4 राज्य ही पूरा कर पाए हैं.

बच्चों को वापस लाने का कर रहे प्रयास

राज्य सरकार ने ‘मिशन जीरो ड्रॉप आउट’ स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस लाने के लिए शुरू किया है लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह काफी मुश्किल कार्य लग रहा है. अभियान के तहत स्कूलों से ड्रॉप आउट हो चुके छात्रों की पहचान करके उन्हें फिर से स्कूल में वापस लाने के लिए प्रयास किया जाएगा लेकिन योजना की शुरुआत में विभाग का काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि प्रदेश में ड्रॉप आउट रेट सुधरने में काफी वक्त लगेगा.

शिक्षा मंत्री गायकवाड़ ने ट्विटर से की थी घोषणा

स्कूल एजुकेशन मिनिस्टर वर्षा गायकवाड़ ने इस योजना की शुरुआत ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट के माध्यम से की थी. शिक्षा मंत्री ने कहा था कि महामारी के कारण शिक्षा में असमानताएं बढ़ी होंगी लेकिन हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिले. लेकिन नीति आयोग की रिपोर्ट बता रही है कि आगे रास्ते काफी मुश्किल होने वाले हैं. बता दें कि इस विशेष अभियान का लक्ष्य राज्य में स्कूल छोड़ने वालों के विषय पर ध्यान आकर्षित करना है. इस मिशन के तहत जिन बच्चों ने महामारी के कारण स्कूल छोड़ दिए थे उन्हें स्कूल वापस लाया जा सकता है. 

21 राज्यों से बेहतर स्थिति हमारी

प्रदेश में ड्रॉप आउट रेट में कई सालों से सुधार नहीं हो रहा है. लेकिन ड्रॉप आउट के मामले में हमारी स्थिति अन्य राज्यों से कहीं बेहतर है. ड्रॉप आउट स्टूडेंट्स के मामले में अगर देशभर की बात की जाए तो हम टॉप-10 में छठवें नंबर पर हैं. 21 राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र में ड्रॉप आउट रेट काफी बेहतर है. सबसे अच्छी स्थिति इस मामले में हिमाचल प्रदेश की है जहां सिर्फ 7 फीसदी बच्चे ही हर वर्ष स्कूल छोड़ रहे हैं. वहीं इस मामले में देशभर में सबसे खराब स्थिति बिहार की है जहां हर वर्ष 39 फीसदी बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं, जबकि केंद्र व विभिन्न राज्यों की सरकारें बच्चों को स्कूल भेजने की व्यवस्था करने के साथ ड्रॉप आउट रेट कम करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं. इसके बावजूद यह आंकड़ा सुधर नहीं रहा है. 

सभी राज्यों में यह है स्थिति

हिमाचल प्रदेश – 7.03%

अंदमान निकोबार – 7.36%

पंजाब – 8.6%

तमिलनाडु – 10.03%

दिल्ली – 10.75%

महाराष्ट्र – 11.28%

हरियाणा – 12.16%

केरल – 12.77%

राजस्थान – 15.19%

आंध्र प्रदेश – 15.71%

गोवा – 16.01%

मणिपुर – 21.05%

तेलंगाना – 22.49%

मध्य प्रदेश – 23.76%

गुजरात – 24.08%

सिक्किम – 24.15%

छत्तीसगढ़ – 24.23%

जम्मू-कश्मीर – 24.35%

कर्नाटक – 26.18%

असम – 27.6%

मेघालय – 28.07%

ओडिशा – 28.87%

अरुणाचल प्रदेश – 29.93%

मिजोरम – 30.67%

नागालैंड – 31.28%

झारखंड – 36.64%

बिहार – 39.73%

13.5% बेटियां तो स्कूल ही नहीं जा रहीं

13.5 प्रतिशत बेटियां शिक्षा के अधिकार से दूर हैं. 6 वर्ष या उससे अधिक उम्र की लड़कियां आज भी स्कूल तक नहीं पहुंच पा रही हैं. पूरे महाराष्ट्र में अगर बेटियों की शिक्षा पर फोकस किया जाए तो आंकड़े और भी कमजोर नजर आते हैं. पूरे राज्य में 23.4% बेटियां आज भी स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच पा रही हैं. ये वो आंकड़े हैं जिनमें 6 साल या उससे अधिक उम्र की लड़कियों ने कभी स्कूल में कदम तक नहीं रखा है. राज्य में सिर्फ 79.6 प्रतिशत बेटियां ही शिक्षा हासिल कर रही हैं.

67.6% बेटियां ही 10वीं से ज्यादा पढ़ी-लिखी

एक सर्वे में रिपोर्ट में बताया गया है कि नागपुर जिले में 67.6 प्रतिशत ही ऐसी महिलाएं हैं जो 10 वर्ष या उससे अधिक वर्षों तक स्कूल गई हैं. 5 साल पहले 2014-15 में यह आंकड़ा सिर्फ 53.1 प्रतिशत ही था. पिछले सालों की तुलना में उच्च शिक्षा लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है. जिले में शिक्षित महिलाओं की संख्या 94.6% है. वहीं पूरे राज्य में देखा जाए तो 50.4% महिलाएं 10वीं से ज्यादा पढ़ी हैं. पुरुषों की बात करें तो 61.0% पुरुष 10 साल से ज्यादा स्कूल गए हैं. राज्य में 84.6% महिलाएं, वहीं 93.0% पुरुष शिक्षित हैं. ऐसे में ड्रॉप आउट रेट को ठीक करने की जरूरत है.