Illegal tree cutting
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  • 400 से ज्यादा पेड़ों की कटाई
  • डेवलपमेंट के नाम पर सैकड़ों पौधों की चढ़ा दी बलि

नागपुर. हरे-भरे पेड़-पौधों को काट कर बगीचा बनाने का अनोखा मामला महानगर के बॉटनिकल गार्डन में चल रहा है. 400 से 500 पेड़-पौधों को अब तक काटा जा चुका है और पेड़ों की कटाई आगे भी जारी है. डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के डीन का कहना है कि डेवलमेंट के नाम पर सिर्फ छोटे-छोटे पौधे काटे जा रहे हैं. गार्डन तैयार करने के लिए ऐसा किया जा रहा है. जबकि बॉटनिकल गार्डन में बड़ी संख्या में हरे-भरे बड़े-बड़े पौधे भी काटे गए हैं. बताया जा रहा है कि पेड़ों को काटने की एनएमसी के उद्यान विभाग से एनओसी ही नहीं ली गई है. बिना परमिशन के ही सैकड़ों पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई है.

400 से ज्यादा पेड़ों की कटाई

नगरसेवक कमलेश चौधरी ने पेड़ों का काटे जाने की शिकायत डीन से की. उन्होंने बताया कि बॉटनिकल गार्डन में पिछले कई दिनों से रोजाना झाड़ काटे जा रहे हैं. अब तक करीब 400 से 500 पेड़ों की कटाई की गई है. जबकि इसे काटने के लिए 21 विभागों की अनुमति लगती है. इसके बाद भी बिना अनुमति के इसे काटा जा रहा है. इस संबंध में डीन डॉ. पंचभाई से बात की गई तो उनको मामले की जानकारी नहीं थी. इसके बाद नगरसेवक कमलेश चौधरी ने मामले की जांच की मांग उठाई. 

धड़ल्ले से काटे जा रहे हैं पेड़

डीन का कहना है कि बड़े पेड़ों की कटाई नहीं की गई है मेंटेनेंस के लिए छोटी-छोटी झाड़ियां काटी गई है. लेकिन जब नवभारत ने गार्डन में जाकर वास्तविक स्थिति को देखा तो, वहां पर बड़े पेड़ों के काटने की भी तस्वीर सामने आई. छोटी झाड़ियों के अलावा बड़े पेड़ों को भी काट दिया गया है. जिसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को तक नहीं थी.

अनुमति नहीं मिली तो कैसे काटे पेड़

बताया जा रहा है पड़ों को काटने के लिए एनएमसी की ओर से परमिशन दिया ही नहीं गया है. ऐसे में जब परमिशन मिला ही नहीं तो आखिरकार इतनी बड़ी संख्या में कैसे पेड़ों को काटा गया. पेड़ों को काटने के लिए विभाग द्वारा 50 से ज्यादा लेबर काम कर रहे हैं. यह ठेकेदार के अंदर में हैं. डीन का कहना है कि ठेकेदार ही पूरा काम देख रहा है. छोटे-छोटे पेड़ों की कटाई के कारण ठेकेदार ने इसकी जानकारी नहीं दी.  

पेड़ों के गट्ठे रखे हैं गार्डन में

एक तरफ विभाग जहां छोटे-छोटे झाड़ियों को काटने की बात कर रहा है, तो वहीं दूसरी ओर मौके पर तस्वीर बिल्कुल उलटी है. बॉटनिकल गार्डन में सैकड़ों की संख्या में पेड़ काटे गए हैं. जिसमें छोटे-छोटे पौधे तो हैं ही साथ ही बड़े-बड़े पेड़ों को काट कर भी गट्ठा बनाकर रखा गया है. नगरसेवक कमलेश चौधरी का कहना है कि लकड़ी काटकर बाहर ट्रक से भेजा जा रहा है लेकिन अधिकारियों को इसकी थोड़ी भी जानकारी नहीं है. 

झाड़ियां काटने का ही किया है काम

डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के डीन डॉ. पंचभाई का कहना है कि जो बीज गिरते हैं उससे जंगल जैसी झाड़ियां उगने लगती है. उसको अगर काटा नहीं गया तो वह जंगल का रूप ले लेती है. हमनें इसलिए छोटे-छोटे झाड़ियों की सफाई की. बीज गिरता है तो समस्या होती है. ठेकेदार ने जलाऊ के लिए कुछ लिया होगा तो वो कोई बड़ी बात नहीं है. मेंटेनेंस नहीं किया होता तो एक साल में ही जंगल बन जाता. इसलिए छोटे पौधे को काटा गया होगा. 

नहीं काटेंगे तो बगीचा बन जाएगा जंगल

डेवलमेंट के लिए दिया है उस पोर्सन को. छोटे-छोटे पेड़ काटे जा रहे हैं.परमिशन के लिए डाले भी थे लेकिन लेट तो होता ही है. मुझे पता नहीं था, फोन आया था तो जानकारी मिली. छोटे-छोटे पेड़ हैं करके ध्यान नहीं दिया. मेंटेनेंस के लिए काटा है नहीं तो जंगल में विकसित हो जाता तो समस्या हो जाती. 

-डॉ. डीएम पंचभाई, डीन, पीडीकेवी नागपुर.