Afgani Arrested in Nagpur

    नागपुर. भारत में अवैध तरीके से घुसपैठ करने वाले पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अफगानियों की संख्या कम नहीं है. बुधवार को पुलिस ने नूर मोहम्मद नामक एक अफगानी को गिरफ्तार किया. वह पिछले 10 वर्षों से नागपुर में अवैध तरीके से रह रहा था. लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि सही मायने में सर्च ऑपरेशन शुरू हो जाए तो शहर में कम से कम 2 दर्जन अफगानी पकड़े जाएंगे जो अवैध तरीके से उपराजधानी में रह रहे हैं. पुलिस के रिकॉर्ड पर शहर में 96 अफगानी रहते हैं. नागपुर आरआरएस का मुख्यालय होने के कारण वैसे भी हमेशा आईबी द्वारा थ्रेट होने की आशंका जताई जाती रही है.

    इसके बावजूद पड़ोसी देशों से लोगों का भारत में प्रवेश करना और नागपुर में आकर बस जाना बहुत चिंता की बात है. कुछ लोग तो यह भी दावा कर रहे हैं कि अब शहर में रोहिंग्याओं का भी आना शुरू हो गया है. लेकिन इसकी पुष्टि तो तभी होगी जब अलग-अलग बस्तियों में अचानक आकर बस रहे लोगों की जांच हो. बांग्लादेशियों का तो कोई हिसाब ही नहीं है. मोमिनपुरा, फारुखनगर टेका और ताजबाग में कई बांग्लादेशी रह रहे हैं. यह दावा इसीलिए भी किया जा सकता है कि जब-जब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हुई हैं कई लोग पकड़े गए हैं. परंतु समय के साथ सब सामान्य हो जाता है.

    डिपोर्ट करने के बाद आ जाते हैं वापस

    सूत्रों का दावा है कि सही मायने अफगानियों की जांच गंभीरता से नहीं होती. यही कारण है कि डिपोर्ट करने के बाद भी अफगानी भारत में दोबारा प्रवेश कर लेते हैं. इसके पहले भी पुलिस ने कई अफगानियों को पकड़ा. 2014 में पुलिस ने करीब 14 अफगानियों को पकड़ने के बाद वापस अफगानिस्तान भेज दिया था. लेकिन वहां आसानी से फर्जी पासपोर्ट बन जाते हैं. दूसरे नाम के साथ अफगानी दोबारा भारत में प्रवेश कर लेते हैं लेकिन शहर बदल लेते हैं. ज्यादातर अफगानी ब्लैंकेट और कालीन बेचने का काम करते हैं. 

    फिर असलम का नहीं मिला सुराग

    बताया जाता है कि वर्ष 2012 में कराची का असलम खान शहर में आया था. पाकिस्तानियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां काफी सतर्क रहती हैं और उन्हें प्रवेश करते ही सीधे पुलिस की स्पेशल ब्रांच को सभी जानकारी देनी पड़ती है लेकिन असलम ने अफगानिस्तान से फर्जी पासपोर्ट बनाया था. कुछ समय वह नागपुर के खदान परिसर में रहा. इस दौरान उसने कुछ जगहों के ब्लू प्रिंट तैयार किए लेकिन पुलिस को उसकी भनक लगने का पता चलते ही वह अचानक गायब हो गया. फिर उसके नागपुर में होने की कोई पुष्टि नहीं हुई. इसके बाद नागपुर क्राइम ब्रांच ने बशीर को पकड़ा था. वह असलम का रिश्तेदार था. असलम के बारे में कुछ ठोस जानकारी पुलिस को नहीं मिल पाई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया. 

    आइसक्रीम की फैक्ट्री लगा चुका था मतीन

    स्पेशल ब्रांच की एंटी टेररिस्ट सेल ने वर्ष 2017 में दिघोरी से ही अब्दुल मतीन सरवर (35) को गिरफ्तार किया था. मतीन भी अफगानी था और अवैध तरीके से शहर में रह रहा था. वर्ष 2006 में घुसैपठ करके वह भारत में आया. कुछ समय शिमला में रहने बाद में नागपुर आ गया था. यहां उसने फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन तक खरीद ली थी. यहां तक कि उसने बैंक से कर्ज लेकर जमीन खरीद ली. ताजबाग के ठाकुर प्लॉट में आइसक्रीम की फैक्ट्री शुरू कर ली. परिसर के नागरिकों से अनबन होने के बाद उसका फर्जीवाड़ा सामने आया और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए.  बुधवार को पकड़ा गया नूर मोहम्मद उसी के साथ दिघोरी में रहता था. मतीन के पकड़े जाने के बाद वह कुछ समय के लिए अंडरग्राउंड हो गया. मामला ठंडा होते ही वह वापस नागपुर आ गया. 

    कोई होटल तो कोई कारखाने में कर रहा काम

    बांग्लादेशियों और अफगानियों के शहर में पैर जमाने का सबसे बड़ा कारण निरंतर जांच न होना है. पहले शहर पुलिस के पास खुफिया विभाग में काम करने वाले अनुभवी लोग थे. जो हर गतिविधियों पर नजर रखते थे. पर अब शायद इस ओर कोई ध्यान नहीं देता. मोमिनपुरा में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी होटलों में काम करते हैं. कुछ उत्तर नागपुर के कारखानों में कढ़ाई और बुनाई का काम करते हैं. सबसे आश्चर्य की बात यह है कि बहुत ही आसानी से उन्हें आधार कार्ड और वोटिंग कार्ड भी मिल जाता है. यह सरकारी कर्मचारियों और स्थानीय दमदार व्यक्ति की मदद के बगैर संभव नहीं है. कई बांग्लादेशी मोमिनपुरा में पकड़े गए हैं. उन्हें मदद करने वालों के खिलाफ कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. 

    सभी की होगी जांच : CP अमितेश कुमार

    मीडिया से चर्चा के दौरान सीपी अमितेश कुमार ने बताया कि नूर 2010 में 6 महीने के टूरिस्ट वीजा पर आया था. इसके बाद से अवैध तरीके से नागपुर में रह रहा था. उसके पकड़े जाने के बाद शहर में रहने वाली सभी विदेशी नागरिकों की जांच करने का निर्णय लिया गया है. रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 2,600 पाकिस्तानी, 96 अफगानी और 269 अन्य विदेशी रहते हैं. खुफिया विभाग को अवैध तरीके से शहर में रहने वालों की जानकारी इकट्ठा करने को कहा गया है. नूर तालिबानी संगठनों का समर्थक है लेकिन उसके आतंकी होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है. मिनिस्ट्री से संपर्क कर उसे वापस अफगानिस्तान भेजने की प्रक्रिया की जा रही है.