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  • संगठनों की संयुक्त बैठक, सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी

नागपुर. राज्य सरकार ने कक्षा नौवीं से 12 तक कक्षाएं सोमवार, 23 नवंबर तक शुरू करने का फैसला लिया है. इस विषय पर मार्गदर्शक सूचना भी जारी की गई हैं तथा सैनिटाइजेशन और अन्य खर्चों की जिम्मेदारी शाला प्रशासन पर डाल दी गई है. सरकार ने विविध शिक्षक संगठन और स्कूल प्रशासन की दिक्कतों को न देखते हुए परस्पर अधिसूचना जारी कर दी है जिससे कुछ स्कूल और शिक्षक संगठनों के शासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया है.

इस विषय को लेकर मंगलवार को शिक्षा क्षेत्र की सभी संगठनों की संयुक्त बैठक श्रीमती दादीबाई देशमुख हिंदू मुलींची शाला में आयोजित की गई. इस बैठक में सभी संगठनों ने 23 नवंबर से स्कूल शुरू कर करने का मन बना लिया है. साथ ही इस बारे में मुख्यमंत्री को पत्र भेज दिया गया है. इस बैठक में शिक्षक विधायक नागो गाणार, जिला मुख्याध्यापक संघ के अध्यक्ष किशोर मासुरकर, भाजपा शिक्षक आघाड़ी के संयोजक अनिल शिवणकर, शिक्षक सेना के अध्यक्ष अनिल पांडे, आरटीई फाउंडेशन के सचिन कालबांडे उपस्थित थे.

सैनेटाइजेशन सुविधा

स्कूल में हाथ धोने के लिए सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी. शासन द्वारा बनाए गए नियमों का पालन कर स्कूल लगाया जाएगा. स्कूल शुरू होने से पहले शाला में आरोग्य, स्वच्छता व अन्य सुरक्षा संबंधी उपाययोजना थर्मल गन, पल्स ऑक्सीमीटर, जंतुनाशक, साबुन और पानी आदि सुविधाएं शाला प्रशासन की उपलब्ध कराकर दी जाएंगी. शाला की स्वच्छता व निर्जुंतुकीकरण कराना पड़ेगा. ऐसे निर्देश स्कूल प्रशासन को दिए गए हैं. इसके अलावा परिवहन साधनों का भी सैनेटाइजेशन करना पड़ेगा.

शिक्षकों की कोरोना जांच

स्कूल के सभी शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को 17 से 22 नवंबर तक कोरोना की जांच कराना अनिवार्य किया गया है. शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को कोरोना जांच की रिपोर्ट स्कूल प्रबंधन को देी पड़ेगी. सरकार की गाइडलाइन्स का पालन कर ही स्कूल शुरू किए जाएंगे.

अभिभावकों की अनुमति जरूरी

विद्यार्थी स्कूल में जाने से पहले पालकों की ओर से लिखित सहमति लेना आवश्यक रहेगा. पालक अपने बच्चे को स्कूल भेजेंगे क्या, इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा. बीमार बच्चों को पालक स्कूल न भेजें, ऐसा निर्देश है. इसके अलावा विद्यार्थियों की स्कूल में उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी बल्कि यह पूर्णत: पालकों की दच्छा पर निर्भर करेगा. स्कूल फुल एटेंडेंस के सभी पुरस्कार बंद रखेंगे. इंग्लिश, गणित और विज्ञान की पढ़ाई पर ध्यान देंए ऐसा पत्र में उल्लेखित है. जिन स्कूलों में कोविड सेंटर खुले थे, प्रशासन उन्हें और कहीं शिफ्ट कर ले. ऐसे स्कूलों का निर्जंतुकीकरण करना जरूरी है.

स्थानीय प्रशासन का आदेश नहीं

महाराष्ट्र राज्य शिक्षण संस्था महामंडल के कार्यवाह रवीन्द्र फडणवीस ने बताया कि आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी और स्थानीय स्थानीय अधिकारियों की है. लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई भी पत्र जारी नहीं किया गया है. 20 नवंबर तक स्कूलों की छुट्टियां होने से अब तक पालकों का अनुमति पत्र भी प्राप्त नहीं हुआ है. 21 से 23 नवंबर तक स्कूलों का सैनिटाइजेशन असंभव है. इसके बारे में भी शासन ने कोई आर्थिक प्रावधान नहीं किया है. विद्यार्थी कोरोनाग्रस्त है या नहीं इसकी जांच कैसे करना है. ऐसी बहुत सी समस्याएं स्कूलों के सामने हैं. इस कारण सभी स्कूलों ने 23 से स्कूल शुरू नहीं करने का फैसला लिया है. 

कोरोना जांच अनिवार्य न हो

विनायकराव देशमुख उच्च माध्यमिक शाला के मुख्याध्यापक पुरुषोत्तम पंचभाई ने कहा कि स्कूल शुरू करते समय बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा. 23 से स्कूल शुरू करना का आदेश है और शिक्षकों की दिवाली की छुट्टी 20 को खत्म हो रही है. 22 को रविवार होने से छुट्टी रहेगी लेकिन शासन द्वारा दिए गए नियम के अनुसार एक ही दिन में तैयारी कैसे की जा सकेगी. कोरोना जांच पारदर्शी नहीं होती है, इसे लेकर शिक्षकों में डर है. इस कारण कोरोना जांच अनिवार्य न होकर ऐच्छिक होनी चाहिए.