Nagpur Corona Update

  • 6 महीने के भीतर सर्वाधिक मौत
  • 40 वर्ष से अधिक वाले हो रहे शिकार

नागपुर. कोरोना संक्रमण तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. अब कोई गली या मोहल्ला नहीं रह गया है, जहां मरीज नहीं मिल रहे हैं. इसके बावजूद लोगों की लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है. लोगों की यही लापरवाही सब सभी पर भारी पड़ने लगी है. पिछले चौबीस घंटे के भीतर जिले में 47 मरीजों की मौत हो गई. इसमें सिटी में सबसे अधिक 33 लोगों की जान चली गई. मरने वालों में अधिकांश 40-60 वर्ष के बताए गये हैं. कोरोना का प्रादुर्भाव अब पूरे वेग पर है. जिस तरह पिछले वर्ष स्थिति बनी थी, बिल्कुल वहीं हालात इन दिनों देखने को मिल रहे हैं.

जानकार मानते हैं कि प्रशासन द्वारा शुरुआत में ही होम आइसोलेशन की दी गई छूट अब भारी पड़ने लगी है. अब भी पॉजिटिव मरीज बाहर घूम रहे हैं. प्रशासन द्वारा पिछले दिनों पॉजिटिव मरीजों के घरों में स्टीकर लगाने का काम शुरू किया गया, लेकिन कुछ ही जगह हुआ है. यही वजह है कि अब भी कौन पॉजिटिव और कौन निगेटिव समझ से परे हैं. यह स्थिति सिटी के लिए खतरनाक बन गई है.

होम आइसोलेशन से बिगड़े हालत 

जिले में चौबीस घंटे के भीतर 16,064 लोगों की जांच की गई. इसमें सिटी में 10,941 और ग्रामीण में 5,123 लोगों के नमूने लिये गये थे. इनमें 3,579 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई. यह संख्या बुधवार की तुलना में फिर अधिक है. सबसे अधिक चिंता का विषय मृत्यु दर है. 47 लोगों की मौत हुई है. अब तक जिले में कोरोना से 4,784 लोग अपनी जान गंव चुके हैं. फिलहाल जिले में 3,4819 एक्टिव केस है. वहीं चौबीस घंटे के भीतर 2,285 मरीजों को छुट्टी दी गई. मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही एक बार रिकवरी रेट घटकर 80 फीसदी पर आ गया है. डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश मरीज गंभीर होने के बाद ही अस्पताल में भर्ती होने आ रहे हैं. दरअसल, शुरुआत के कुछ दिनों तक घर पर दवाई लेते हैं. देखा जाये तो होम आइसोलेशन में नियमित रूप से जांच होनी चाहिए. ऑक्सीजन लेकर और ब्लड प्रेशर की समय-समय पर जांच होने से बीमारी के बारे में पता चलता है. साथ ही 7 वें या फिर 10 दिन एक बार फिर से टेस्ट कराया जाना चाहिए. लेकिन अधिकांश संक्रमित नियमित जांच-पड़ताल नहीं करा रहे हैं. यही वजह है कि बीमारी भी दबे पांव हमला तेज कर रही हैं. 

निजी अस्पतालों में मैन पॉवर की कमी 

मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही एक बार फिर निजी अस्पतालों में बेड की किल्लत शुरू हो गई है. इतना ही नहीं कई अस्पतालों ने प्रतिदिन के शुल्क में भी वृद्धि कर दी है. मैन पॉवर की कमी प्राइवेट अस्तालों में भी बनी हुई है. यही वजह है अस्पताल प्रबंधन अधिक सैलेरी का वादा कर अपने स्टाफ से ओवर टाइम भी करा रहे हैं, पिछले वर्ष की तरह अस्पतालों में कार्य करने वाले डॉक्टर सहित स्टाफ के लिए आइसोलेशन की व्यवस्था नहीं की गई है. यही वजह है कि संक्रमण और तेजी से फैलने की संभावना भी प्रबल हो गई है.