मुंबई से बड़े पैमाने पर एमडी की तस्करी, शहर के व्यापारी और युवा नशे के आगोश में

नागपुर. मुंबई के ड्रग्स माफियाओं के लिंक केवल बॉलीवुड और राज्य की राजधानी तक सीमित नहीं है. उपराजधानी में भी ड्रग्स का बड़ा बाजार खुल गया है. कुछ वर्ष पहले तक शहर में केवल गांजा और चरस का नशा होता था, लेकिन जब से एमडी (मेफेड्रान ड्रग्स) की एंट्री हुई है कई रैकेट सक्रिय हो गए है. मुंबई से बड़े पैमाने पर एमडी की तस्करी हो रही है. कई ड्रग्स रैकेट शहर में सक्रिय है. पहले तो ट्रेन से ड्रग्स नागपुर आता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद से ड्रग माफिया सड़क मार्ग से माल नागपुर पहुंचा रहे है.

शहर के कई व्यापारी और युवा नशे के आगोश में आ चुके है. कई व्यापारी एमडी की नशे की लत में बर्बाद हुए है. चिंता की बात ये है कि ड्रग पेडलर अपना व्यापार बढ़ाने के लिए छात्रों को टार्गेट कर रहे है. उन्हें नशे की लत लगाकर आपराधिक गतिविधियों में शामिल कर रहे है. क्राइम ब्रांच की एनडीपीएस सेल छुट-पुट विक्रेताओं को पकड़कर अपनी पीठ थप-थपाने में खुश है, लेकिन जब तक ड्रग्स सप्लाई की चेन नहीं टूटेगी शहर में ड्रग्स का व्यापार चलता रहेगा. 

नए पेडलर हुए सक्रिय 

कुछ समय पहले पुलिस ने नागपुर को ड्रग्स फ्री सिटी बनाने पर काम शुरु किया था. आबू, जावेद बच्चा, बंटी बग्गा, बंटी कारडा और कुछ विक्रेताओं पर नकेल कसी गई. लंबे समय तक जमानत नहीं मिलने के कारण उनका व्यापार तो बंद हो गया, लेकिन अब नए पेडलर शहर में सक्रिय हो गए है. हसनबाग का राजा चना और शाहरुख चील की गिनती शहर के बड़े सप्लायरों में होती है. राजा केवल नागपुर ही नहीं बल्कि पूरे विदर्भ में माल सप्लाई करता है.

वह मुंबई के हबीब नामक ड्रग पेडलर से माल खरीद कर बड़े पैमाने पर नागपुर और अमरावती में माल बेचता है. शाहरुख चील पहले 2-4 पुड़िया बेचकर अपना काम चलाता था, लेकिन जब से मुंबई की हेना शाह से उसकी दोस्ती हुई उसने मुंबई में ही अपना धंधा शुरु कर दिया. अब वह नागपुर में माल सप्लाई करने वाला बड़ा ड्रग डीलर बन गया है.

शहर के बड़े ड्रग पेडलर में मोहसीन अकोला का नाम भी आता है. वह मुंबई के सैफ बटाटा से माल खरीदता है. उत्तर नागपुर का मक्सूद पहले गर्द का धंधा करता था. एमडी की डिमांड बढ़ने से वह भी धंधे में उतर गया. उसके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके है. यशोधरानगर का आमिर मलिक भी एक महिला के जरिए इस धंधे में आया. इन सभी के तार मुंबई से जुड़े हुए है. 

मिर्ची के ट्रकों में आता है माल

पहले ड्रग माफियाओं का माल ट्रेन से नागपुर लाया जाता था. शहर के युवाओं को अच्छी कमाई का लालच देकर दुरंतो से मुंबई भेजा जाता था. कालेज बैग में माल रखकर वापस दुरंतो ट्रेन में ही तस्कर नागपुर आते थे, लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद रेल परिवहन बंद हो गया था. इसीलिए माल सड़क मार्ग से लाया जाने लगा. नागपुर से बड़े पैमाने पर मुंबई में मिर्ची सप्लाई होती है.

ट्रकों में मिर्ची मुंबई भेजी जाती है और मिर्ची ले जाने वाले ट्रकों का किराया भी ज्यादा होता है. लौटते समय इन ट्रकों के चालक जो माल मिले गाड़ी में लाद लेते है. इसके साथ ही मुंबई से एमडी भी भेजी जाती है. ट्रक मालिक को भनक तक नहीं लगती. चालक को माल लाने के लिए मोटी रकम दी जाती है. ट्रकों की तलाशी नहीं होती और पाव-आधा किलो माल कहीं भी छुपाया जा सकता है. पुलिस को संदेह भी नहीं होता. 

एनडीपीएस सेल में अनुभव की कमी

नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने और ड्रग माफियाओं को पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच में एनडीपीएस की विशेष सेल है. इस सेल का काम ही ड्रग सप्लायरों को पकड़ना है. लेकिन अनुभव की कमी होने के कारण नए ड्रग पेडलर शहर में सक्रिय हो गए है. या तो एनडीपीएस सेल को इनकी जानकारी नहीं है या तो जानकारी होने के बावजूद इन बड़े रैकेट को नजरंदाज किया जा रहा है. पिछले दिनों एनडीपीएस सेल ने अपराधी संतोष आंबेकर के भांजे सनी वर्मा को मुंबई के ड्रग पेडलर के साथ गिरफ्तार किया था. लेकिन ऐसे कई ड्रग पेडलर शहर में सक्रिय है जिनपर पुलिस अब तक शिकंजा नहीं कस पाई है.