Nagpur-Jabalpur broad gauge
File Photo

  • 376.21 करोड़ से 1400 करोड़ पहुंचा बजट

नागपुर. जनहित कार्य होने के बावजूद सरकारी नजरअंदाजी, लेटलतीफी, लापरवाही और ठोस निर्णय लेने में देरी के चलते विभिन्न विकास कार्यों की लागत बढ़ना हमारे देश में कोई नई बात नहीं है. नागपुर से नागभीड़ तक नैरोगेज को ब्राडगेज रूट में बदलने की परियोजना भी इसी लेटलतीफी के कारण 376.21 करोड़ से 1400 करोड़ की हो गई. 116.15 किमी लंबे इस नैरागेज ट्रैक को ब्राडगेज में बदलने के लिए लंबे समय तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये और जब निर्णय हुआ तब तक लागत करीब 1,000 करोड़ रुपये बढ़ चुकी थी. वहीं, कोरोना के कारण रेलवे की विकास परियोजनाओं की रफ्तार काफी धीमी हो गई है. कोरोना के कारण हो रहे नुकसान का खामियाजा नागपुर-नागभीड़ ब्राडगेज प्रोजेक्ट को भी उठाना पड़ रहा है.

2013 में कम लागत

मिली जानकारी के अनुसार, 2013-14 में केन्द्र सरकार ने उक्त परियोजना को मंजूरी दी थी. इस समय निर्णय लिया गया कि इसमें महाराष्ट्र सरकार द्वारा 50 प्रतिशत आर्थिक सहभागिता रहेगी. यह निर्णय 21 जनवरी 2013 को लिया गया. इस समय परियोजना की लागत 376.21 करोड़ रुपये तय की गई जिसमें से 188.11 करोड़ रुपये राज्य सरकार देगी. इसमें विद्युतीकरण का खर्च शामिल नहीं था. इसके बाद रेल मंत्रालय ने 708.11 करोड़ रुपये का सुधारित बजट पेश किया. इसमें भी 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी की शर्त रही. 19 सितंबर 2017 को राज्य सरकार ने इसकी मान्यता प्रदान की. इस समय राज्य सरकार को 354.055 करोड़ रुपये का वहन करना था.

आधा हिस्सा भी काफी ज्यादा

इससे पहले 24 जनवरी 2017 को राज्य सरकार द्वारा महाराष्ट्र रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (एमआरआईडीसी) की स्थापना की गई. तय किया गया कि उपरोक्त प्रोजेक्ट के लिए एमआरआईडीसी 60 प्रतिशत कर्ज देगी जबकि बाकी 40 प्रतिशत खर्च केन्द्र व राज्य सरकार आधा-आधा वहन करेगी. इसके बाद 30 जुलाई 2020 को जारी निर्णय के अनुसार, नागपुर-नागभीड़ ब्राडगेज प्रोजेक्ट की लागत फिर बढ़ाकर 1,400 करोड़ कर दी गई. इसमें से 60 प्रतिशत राशि यानि 840 करोड़ रुपये एमआरआईडीसी देगी जबकि बाकी 40 प्रतिशत में से 280 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा विभिन्न चरणों में दिये जायेंगे. जबकि इतनी ही राशि केन्द्र सरकार द्वार प्रदान की जायेगी. कर्ज की 840 करोड़ राशि में भी केन्द्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा 420 करोड़ -420 करोड़ रुपये भुगतान का निर्णय लिया गया था. इन आंकड़ों से साफ है कि लेटलतीफी ने पूरी परियोजना की लागत 376.21 करोड़ से सीधे 1400 करोड़ तक पहुंचा दी.

कई मायनों में फायदेमंद होगी ब्राडगेज

इसमें कोई दो राय नहीं कि नागपुर-नागभीड़ ब्राडगेज परियोजना पूरी होने के बाद कई मायनों में फायदेमंद साबित होने वाली है. 116 किमी का यह रूट प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 150 गांवों को जोड़ेगा. वहीं, चंद्रपुर से लगे पर्यटन क्षेत्रों के विकास में यह सहायक साबित होगी. रेलवे के नजरिये से नागपुर और चंद्रपुर के लिए एक नया रूट मिल जायेगा और वर्तमान रूट से मालगाड़ियों का दबाव कम करके यात्री ट्रेनों की गति और संख्या बढ़ाई जा सकती है. इससे मुंबई-नागपुर-गोंदिया-कोलकाता और गोंदिया-वसाड़-नागभीड़-चंद्रपुर-हैदराबाद 2 महत्वपूर्ण मार्गों का निर्माण होगा.